हजारीबाग और चतरा जिले की सीमा पर संचालित सीसीएल की चंद्रगुप्त कोल परियोजना एक बार फिर आंदोलन का केंद्र बन गई है। भारतीय क्रांतिकारी मजदूर संघ विस्थापित मोर्चा के बैनर तले स्थानीय भू-रैयत अपनी दस सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ गए हैं।
धरना स्थल पर पचड़ा, जोरदाग, नौवा खाप और बुकरु गांव के विस्थापित प्रभावित भू-रैयत बड़ी संख्या में मौजूद हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरने पर बैठे लोगों ने एमडीओ कंपनी सुसी इंफ्रा माइनिंग लिमिटेड के प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंपनी स्थानीय लोगों की अनदेखी कर बाहरी मजदूरों को रोजगार दे रही है, जिससे क्षेत्र के विस्थापित परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जब स्थानीय लोग अपने हक और रोजगार की मांग करते हैं, तो उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करा दिए जाते हैं। इतना ही नहीं, इंजुरी रिपोर्ट भी स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र की बजाय रांची से बनवाकर केस को मजबूत करने की कोशिश की जाती है।
धरना दे रहे भू-रैयतों की मुख्य मांगों में परियोजना क्षेत्र के 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी विस्थापित प्रभावित लोगों को रोजगार देना, विधवा और इच्छुक महिलाओं को भी नौकरी में प्राथमिकता देना शामिल है। इसके अलावा कोयला उत्पादन का 60 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय रैयतों के लिए सुरक्षित कर उन्हें रोजगार से जोड़ने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल परियोजना क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बनी हुई है।
संवाददाता: सुनील कुमार ठाकुर
