पटना: बिहार की राजधानी पटना के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों आगलगी की घटनाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज पछुआ हवा और बिजली के तारों से निकलने वाली चिंगारी सूखी गेहूं की फसल के लिए विनाश का कारण बन रही है। चंद सेकेंड में आग विकराल रूप ले लेती है और देखते ही देखते पूरे खेत को अपनी चपेट में ले लेती है।

सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र मसौढ़ी अनुमंडल के मसौढ़ी और धनरूआ प्रखंड हैं, जहां पिछले एक सप्ताह में करीब 200 बीघे से अधिक फसल जल चुकी है। धनरूआ के बौरही और देवदाहा गांव में 15 किसानों को भारी नुकसान हुआ है, जबकि मसौढ़ी के शाहाबाद, काजीचक और बेलौटी गांव में तीन दर्जन से अधिक किसानों की लगभग डेढ़ सौ बीघे फसल जलकर राख हो गई।

शाहाबाद गांव में दोपहर के समय अचानक लगी आग ने 22 किसानों की खड़ी गेहूं की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया। आग इतनी भयानक थी कि दूर-दूर तक धुएं का गुबार देखा गया और गांव में अफरातफरी मच गई।

घटना के समय अधिकतर किसान घरों में थे, लेकिन गांव के युवकों ने शोर मचाकर लोगों को इकट्ठा किया। ग्रामीणों ने पंपिंग सेट, पानी और मिट्टी की मदद से घंटों प्रयास कर आग पर काबू पाने की कोशिश की। हालांकि, फायर ब्रिगेड टीम करीब तीन घंटे देरी से पहुंची, जिससे लोगों में नाराजगी देखी गई।

इस आगलगी में गिरजानंद शर्मा, धनंजय कुमार और अजय शर्मा समेत कई किसानों की फसल बर्बाद हो गई। पीड़ित किसानों का कहना है कि वे फसल बेचकर कर्ज चुकाने की योजना बना रहे थे, लेकिन आग ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है। वहीं, बिजली विभाग किसानों को ट्रांसफार्मर के आसपास की फसल हटाने की सलाह दे रहा है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। लगातार बढ़ रही आगलगी की घटनाओं ने किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

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