बिहार के कटिहार नगर निगम क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां विकास के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। वार्ड नंबर 2 के गौशाला मोहल्ले में आजादी के 70 साल बाद पहली बार सड़क बन रही थी। इलाके के लोग इस काम से बेहद खुश थे, लेकिन उनकी खुशी जल्द ही डर और गुस्से में बदल गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क निर्माण में मिट्टी और गिट्टी की जगह अस्पतालों से निकले खतरनाक मेडिकल कचरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। रोजाना ट्रकों से यह कचरा लाकर सड़क पर डाला जा रहा है और उसके ऊपर पेवर ब्लॉक बिछाए जा रहे हैं। हालत यह है कि सड़क पर जगह-जगह इंजेक्शन की सुइयां, टूटे कांच, सर्जिकल ब्लेड और खून से सनी पट्टियां साफ देखी जा सकती हैं।
इससे न केवल दुर्गंध फैल रही है, बल्कि राहगीरों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों के पैरों में सुइयां चुभने और जख्म होने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। लोगों का कहना है कि ऐसी सड़क से बेहतर है कि सड़क ही न बने।
विशेषज्ञ भी इसे बेहद खतरनाक मान रहे हैं। कटिहार के चिकित्सक डॉ. रमन कुमार के अनुसार, बायो-मेडिकल कचरे को बिना ट्रीटमेंट के खुले में इस्तेमाल करना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। इससे संक्रमण, वायु और जल प्रदूषण के साथ कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
कानूनी तौर पर भी यह पूरी तरह गलत है। बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत ऐसे कचरे का सुरक्षित निपटान अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित अस्पताल, ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने जांच के आदेश दिए हैं और नगर निगम को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं नगर आयुक्त संतोष कुमार ने भी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।
अब सवाल यह है कि आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है? और क्या प्रशासन समय रहते इस ‘जानलेवा सड़क’ के निर्माण को रोक पाएगा? फिलहाल, इलाके के लोग सुरक्षित और मानकों के अनुरूप सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं।
