गया जिले में स्थित गयाजी डैम से पानी छोड़े जाने के बाद शनिवार को एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब बड़ी संख्या में लोग मछली पकड़ने के लिए नदी की ओर उमड़ पड़े। प्रशासन की सख्त चेतावनियों के बावजूद लोग जाल, बाल्टी और बर्तन लेकर नदी में उतर गए और जमकर मछलियां पकड़ने लगे।
दरअसल, जिला प्रशासन ने रबर डैम की सफाई के उद्देश्य से 3 अप्रैल को पानी छोड़ने का निर्णय लिया था। शुक्रवार रात को जैसे ही डैम से पानी छोड़ा गया, वैसे ही पानी का स्तर घटने लगा और बड़ी संख्या में मछलियां बाहर आने लगीं। इसकी जानकारी मिलते ही शनिवार सुबह से ही युवक, बच्चे और बुजुर्ग नदी किनारे जुटने लगे। जिसे जितनी मछलियां मिली, वह लेकर घर गया, जबकि कई लोग बार-बार नदी में उतरकर और मछलियां पकड़ते नजर आए।
गौरतलब है कि गया जिले की फाल्गु नदी ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यह नदी ज्यादातर समय सूखी रहती है, इसलिए बिहार सरकार ने करीब 334 करोड़ रुपये की लागत से रबर डैम का निर्माण कराया था, ताकि बारिश के पानी को संरक्षित कर सालभर तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कार्य किए जा सकें।
हालांकि, समय के साथ पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाले फूल-पत्तियों और अन्य सामग्री के कारण डैम का पानी दूषित हो गया था। इससे दुर्गंध और गंदगी की समस्या बढ़ गई थी, जिससे तीर्थ यात्रियों को काफी परेशानी हो रही थी। इसी को देखते हुए प्रशासन ने डैम के पानी को डाउनस्ट्रीम में छोड़कर सफाई कराने का निर्णय लिया।
गयापाल पंडा पप्पू पांडे ने बताया कि पानी में काफी गंदगी थी, जिससे श्रद्धालुओं को दिक्कत हो रही थी। देवघाट पर रोजाना हजारों तीर्थयात्री पिंडदान के लिए आते हैं, लेकिन बदबू के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब पानी छोड़ने के बाद डैम और घाटों की सफाई की जाएगी, जिससे स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
