सहरसा में सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पहले शिक्षा विभाग में वर्षों तक अनुपस्थित रहकर वेतन लेने का मामला सामने आया था, और अब स्वास्थ्य विभाग में भी कुछ ऐसा ही मामला उजागर हुआ है।
सिविल सर्जन सह चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. राज नारायण प्रसाद ने बीपीएम के साथ नौहट्टा और पंचगछिया सीएचसी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, कर्मियों की उपस्थिति और संसाधनों की जांच की गई।
इस दौरान सबसे बड़ी लापरवाही तब सामने आई जब डॉक्टर प्रियंका भारती और विकास यादव ज्वाइन करने के बावजूद ड्यूटी पर मौजूद नहीं पाए गए। इसे गंभीर मानते हुए सिविल सर्जन ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला पदाधिकारी को लिखित अनुशंसा भेज दी है।
वहीं नौहट्टा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी संजीव कुमार सिंह को भी इस मामले में सूचना नहीं देने का दोषी पाया गया है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
पंचगछिया सीएचसी में भी कई खामियां उजागर हुईं। स्वास्थ्य कर्मी ड्रेस कोड में नहीं थे और मरीजों के लिए बिछाए गए बेड की चादरें भी मानक के अनुरूप नहीं मिलीं। इस पर सिविल सर्जन ने सख्त निर्देश देते हुए ड्रेस कोड का पालन और साफ-सफाई सुनिश्चित करने को कहा।
डॉ. राज नारायण प्रसाद ने स्पष्ट कहा कि दवाइयों और सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन कर्मियों की लापरवाही मरीजों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब लगातार दो विभागों—शिक्षा और स्वास्थ्य—में सामने आ रही लापरवाही ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं।
