नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और कई स्कूलों में 6 अप्रैल से कक्षाएं शुरू होने जा रही हैं, लेकिन इस बार 9वीं कक्षा के छात्रों की उत्सुकता चिंता में बदल गई है। आमतौर पर नए सत्र में बच्चों के चेहरे पर नई किताबों और सपनों की चमक दिखती है, लेकिन इस बार उनके हाथ खाली हैं। बाजार में 9वीं की नई NCERT किताबें उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्र और अभिभावक दोनों परेशान हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत इस वर्ष कक्षा 9 के सिलेबस में बड़े बदलाव किए गए हैं। साइंस, सोशल साइंस, इंग्लिश और मैथ्स जैसे विषयों में कई अध्याय जोड़े और हटाए गए हैं, साथ ही कुछ टॉपिक्स को नए तरीके से शामिल किया गया है। ऐसे में पुरानी किताबें अब उपयोगी नहीं रह गई हैं और छात्रों को नई किताबों का इंतजार है।
छात्रा अनन्या झा ने बताया कि हर साल वह परीक्षा खत्म होते ही अगली कक्षा की किताबें खरीद लेती थीं और पहले से पढ़ाई शुरू कर देती थीं। इससे कक्षा में समझने में आसानी होती थी, लेकिन इस बार 8वीं की परीक्षा खत्म हुए एक महीने से ज्यादा हो गया है और अभी तक किताबें नहीं मिली हैं। इससे उन्हें डर है कि सिलेबस पूरा करने में देर हो जाएगी।
पटना के कदमकुआं स्थित ज्ञान गंगा पुस्तक दुकान, जो NCERT की बड़ी सप्लायर मानी जाती है, वहां भी 9वीं की एक भी नई किताब उपलब्ध नहीं है। दुकान से जुड़े अमित कुमार सिंह के अनुसार, रोज बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक किताबों के लिए आ रहे हैं, लेकिन स्टॉक नहीं होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 15 से 30 अप्रैल के बीच किताबें बाजार में आ सकती हैं।
इस मामले पर बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा कि सिलेबस में बदलाव के कारण ऐसी स्थिति अस्थायी रूप से बनती है। विभाग इस पर नजर बनाए हुए है और जल्द से जल्द किताबें उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
