देशभर के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड के तहत अब कर्मचारियों को अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, उसे कंपनी से निकाला जाता है या कंपनी बंद हो जाती है, तो महज 2 कार्य दिवस के भीतर उसका पूरा फुल एंड फाइनल (F&F) सेटलमेंट करना अनिवार्य होगा।

यह प्रावधान ‘कोड ऑन वेजेस 2019’ की धारा 17(2) के तहत किया गया है। अभी तक कंपनियां सेटलमेंट में 45 से 90 दिनों तक का समय लेती थीं, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, इस्तीफे के दूसरे कार्यदिवस तक कर्मचारी के खाते में उसका पूरा बकाया आ जाना चाहिए।

फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में केवल अंतिम महीने की सैलरी ही नहीं, बल्कि कई अन्य भुगतान भी शामिल होते हैं। इसमें काम किए गए दिनों का बकाया वेतन, बची हुई छुट्टियों का पैसा (लीव एनकैशमेंट), बोनस और इंसेंटिव, ग्रेच्युटी और ऑफिस से जुड़े खर्चों की प्रतिपूर्ति शामिल होती है।

ग्रेच्युटी के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक कंपनी में काम करना जरूरी होता था, लेकिन अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए यह अवधि घटाकर 1 साल कर दी गई है। यानी एक साल काम करने के बाद भी कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार होगा, जिसे कंपनी को 30 दिनों के भीतर देना होगा।

इस नए नियम से खासकर युवाओं को फायदा होगा, जो करियर की शुरुआत में अक्सर नौकरी बदलते रहते हैं। इससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा। हालांकि, कंपनियों के लिए यह बदलाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उन्हें अपने पेरोल और तकनीकी सिस्टम को तेज और अधिक प्रभावी बनाना होगा।

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