
रिश्वत लेने के करीब 17 साल पुराने मामले में भागलपुर निगरानी कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। निगरानी कोर्ट के एडीजे दीपक कुमार की अदालत ने सहरसा जिले के सौर बाजार अंचल के हल्का नंबर-8 के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी अरविंद कुमार सिन्हा को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर उन्हें दो माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
यह मामला वर्ष 2009 का है। जानकारी के अनुसार, सौर बाजार निवासी हरे कृष्ण कुमार ने अपनी पत्नी के नाम जमीन खरीदी थी। जमीन के म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए राजस्व कर्मचारी अरविंद कुमार सिन्हा ने उनसे पांच हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। रिश्वत की मांग से परेशान हरे कृष्ण कुमार ने मामले की शिकायत निगरानी विभाग से की।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने के बाद निगरानी टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। इसके तहत 11 जून 2009 को निगरानी विभाग की टीम ने राजस्व कर्मचारी अरविंद कुमार सिन्हा को पांच हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था।
गिरफ्तारी के बाद मामले में निगरानी विभाग की ओर से जांच और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद मामला भागलपुर निगरानी न्यायालय में चला। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अरविंद कुमार सिन्हा को रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार दिया।
अदालत ने दोषी राजस्व कर्मचारी को दो वर्ष के कारावास के साथ 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
फैसले की जानकारी लोक अभियोजक, विजिलेंस स्पेशल रामबदन कुमार चौधरी ने दी। निगरानी कोर्ट के इस फैसले को भ्रष्टाचार के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित इस मामले में फैसला आने के बाद रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी स्पष्ट संदेश गया है।





