रांची से एक बड़ी खबर सामने आई है। वर्ष 2019 के स्थगित जमाबंदी को लेकर आज रांची में सीआईडी के डीएसपी नवल किशोर प्रसाद चास अंचल कार्यालय पहुंचे और रजिस्टर टू की जांच की। मामला तब सुर्खियों में आया जब स्थगित जमाबंदी को स्थानांतरण के एक दिन बाद ऑनलाइन कर दिया गया था।
डीएसपी नवल किशोर प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में बताया कि फिलहाल मामला जांच के अधीन है। उन्होंने कहा कि मामले की हर बारीकी से जांच की जा रही है और दोषियों को जिम्मेदारी तय करने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, यह मामला बांधगोडा मौजा का है। यहां आर्यभट आवास सहयोग समिति की लगभग 5 एकड़ जमीन के स्थगित जमाबंदी में गड़बड़ी की गई थी। इसमें वन विभाग की एक एकड़ 32 डिसमिल जमीन भी शामिल थी। यह जमीन अनधिकृत तरीके से ऑनलाइन कर दी गई थी। इस घटना को लेकर संबंधित पक्ष ने सीआईडी में कंप्लेंट दर्ज कराया था।
स्थगित जमाबंदी को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए डीएसपी ने चास अंचल कार्यालय में मौजूद रजिस्टर टू का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने रजिस्टर के प्रत्येक रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन को बारीकी से देखा।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी बताया कि मामले की जांच के दौरान जो भी कागजात और डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे, उन्हें पूरी तरह से सुरक्षित किया जाएगा। जांच में यह देखा जा रहा है कि किस प्रकार यह जमाबंदी ऑनलाइन की गई और इसमें किसका हाथ रहा।
इस मामले को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) भी स्वतंत्र रूप से जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों एजेंसियां मिलकर मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कर रही हैं।
स्थानीय लोग और जमीन से जुड़े पक्ष इस मामले को लेकर गंभीर हैं और चाह रहे हैं कि गड़बड़ी करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। फिलहाल, सीआईडी और एसीबी की जांच जारी है और आने वाले दिनों में मामले में आगे की कार्रवाई की जानकारी साझा की जाएगी।
यह मामला सरकारी जमीन और वन विभाग की जमीन से जुड़ा होने के कारण विशेष ध्यान का विषय बना हुआ है। जांच में सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
