झारखंड के हजारीबाग जिले से एक दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है। जिले के एक गांव में अंधविश्वास और तांत्रिकों के कहे पर एक किशोरी की बलि दे दी गई। पुलिस के अनुसार, यह घटना अष्टमी की रात को घटी, जब गांव में रामनवमी का मंगला जुलूस चल रहा था।
मृतका की मां रेशमी देवी अपने बेटे के मानसिक और शारीरिक रोग का इलाज कराने के लिए तांत्रिक शांति देवी के पास गई थीं। तांत्रिक ने दावा किया कि बेटे की सभी बिमारियों को ठीक करने के लिए एक कुंवारी लड़की की बलि देना आवश्यक है। इसके प्रभाव में आकर रेशमी देवी और अन्य आरोपी भीम राम ने इस क्रूर कदम को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार, हत्या के दौरान तांत्रिक ने अमानवीय कृत्य किए और भीम राम ने अनुष्ठान के लिए लड़की के सिर पर वार किया। घटना के बाद शव को गांव के एक बगीचे में दफनाया गया। आरोपियों ने जांच को गुमराह करने के लिए झूठी कहानी गढ़ी, जिसमें दुष्कर्म की बात कही गई। हालांकि, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मृतका की मां रेशमी देवी, 55 वर्षीय तांत्रिक शांति देवी और 40 वर्षीय भीम राम शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि भीम राम पर पहले भी अपनी भाभी और एक अन्य व्यक्ति की हत्या के मामले दर्ज हैं। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है।
इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और त्वरित जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं, इस घटना के विरोध में विपक्षी पार्टी भाजपा ने हजारीबाग में 12 घंटे का बंद बुलाया। बंद के दौरान बाजार, स्कूल और अन्य कार्यालय बंद रहे, और लोगों ने घटनाक्रम के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अंधविश्वास और तांत्रिकों के कुप्रभाव से बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर खतरा है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस को ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई करने और समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है।
पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन और डीआईजी अंजनी झा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जांच अभी जारी है और सभी साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि इस तरह के अंधविश्वासों से दूर रहें और किसी भी प्रकार की तांत्रिक क्रियाओं में शामिल न हों।
यह मामला हजारीबाग जिले के लिए बेहद चिंता का विषय है और पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कानून और न्याय व्यवस्था पर जनता की नजरें टिकी हुई हैं कि दोषियों को कड़ी सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस घटना ने समाज में अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता और सख्त कानून की जरूरत को भी उजागर किया है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और न्यायिक प्रणाली पर अब लोगों की निगाहें हैं कि वे इस तरह के घिनौने अपराधों को रोकने और दोषियों को सजा दिलाने में कितना सक्षम हैं।
