मुंगेर से एक चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आ रही है। यहां एक पुल के दो पिलर हवा में झूलते नजर आ रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हैरानी की बात यह है कि इस जर्जर और खतरनाक पुल से हर दिन हजारों लोग गुजर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक खामोश हैं। यह मामला तारापुर विधानसभा क्षेत्र का है, जो राज्य के उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी का इलाका है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

मुंगेर जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर टेटिया बंबर प्रखंड के कटियारी पंचायत में महाने नदी पर बना यह पुल इन दिनों खतरे की घंटी बजा रहा है। ऊपर से देखने पर पुल की सड़क ठीक-ठाक नजर आती है, लेकिन नीचे का दृश्य बेहद डरावना है। पुल के दो पिलरों के नीचे की मिट्टी और बालू नदी के तेज बहाव में बह चुकी है, जिससे पिलर का बड़ा हिस्सा हवा में लटक गया है।

 

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पूरे पुल का भार अब कमजोर पिलरों पर टिका हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द मरम्मत नहीं की गई, तो यह पुल कभी भी ध्वस्त हो सकता है। इस पुल से हर दिन सैकड़ों वाहन और एक हजार से अधिक लोग गुजरते हैं।

 

यह पुल पतघाघर-जमुआ मार्ग को जोड़ता है और करीब एक दर्जन गांवों की लाइफलाइन बना हुआ है। अगर यह पुल टूटता है, तो पतघाघर, खपरा, पौड़िया, सुपोल जमुआ, गोनय, सराय और चांदपुर समेत कई गांवों का संपर्क पूरी तरह से कट जाएगा।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल काफी पुराना और जर्जर हो चुका है। पिछले कई महीनों से इसकी हालत खराब बनी हुई है। उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या हजारों लोगों की जान जोखिम में डालकर जिम्मेदार चुप बैठे रहेंगे, या इस खबर के बाद कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?

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