पटना: बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब राजद के बागी विधायक फैसल रहमान ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब हाल ही में 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में फैसल रहमान वोटिंग में शामिल नहीं हुए थे। उनके साथ कांग्रेस के तीन विधायक भी अनुपस्थित रहे, जिसका सीधा असर राजद उम्मीदवार की हार के रूप में सामने आया।
फैसल रहमान ने खुद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक शिष्टाचार भेंट थी, जिसमें उनके क्षेत्र ढाका के विकास को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई योजनाओं पर मुख्यमंत्री से बातचीत हुई और मुख्यमंत्री ने सकारात्मक आश्वासन भी दिया।
इस बीच कांग्रेस के बागी विधायकों की गतिविधियां भी चर्चा में हैं। हाल ही में कांग्रेस के एक विधायक ने मंत्री से मुलाकात की थी, जिसे उन्होंने क्षेत्रीय विकास से जुड़ा बताया। हालांकि कांग्रेस और राजद दोनों ही दलों ने बागी विधायकों पर कार्रवाई की बात कही है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में नई सरकार के गठन से पहले बागी विधायक अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं। विशेषज्ञ सुनील पांडे के अनुसार, राजद के पास सीमित विधायक हैं और यदि संख्या में कमी आती है तो की नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। यही कारण है कि पार्टी फिलहाल कोई सख्त कदम नहीं उठा रही।
इसी बीच विधानसभा की 19 समितियों का गठन भी किया गया है, जिसमें फैसल रहमान और कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह को अध्यक्ष बनाया गया है। यह नियुक्ति 2026-27 वित्त वर्ष के लिए 1 अप्रैल से प्रभावी है। इससे यह संदेश भी जा रहा है कि बागी विधायकों को राजनीतिक तौर पर महत्व दिया जा रहा है।
