
गया: बिहार के गया जिले के ईश्वरपुर गांव के लिए 13 अगस्त 2026 का दिन बेहद गौरवपूर्ण रहा। देश के प्रसिद्ध ध्रुपद गायक पंडित कृष्ण मोहन पाठक को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित विशेष अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
पंडित कृष्ण मोहन पाठक देश के जाने-माने ध्रुपद गायकों में शामिल हैं। उन्हें संगीत की कला विरासत में मिली। उनके परदादा, दादा और पिता भी ध्रुपद गायन से जुड़े रहे। परिवार की चौथी पीढ़ी के रूप में उन्होंने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई।
उन्हें यह सम्मान हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के ध्रुपद गायन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, कला के संरक्षण और इसके प्रचार-प्रसार के लिए दिया गया है। उनके सैकड़ों शिष्य भारत सहित विदेशों में भी संगीत की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
पंडित कृष्ण मोहन पाठक के पुत्र शैलेंद्र कुमार पाठक ने इस उपलब्धि को पूरे परिवार और ईश्वरपुर गांव के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलना उनके परिवार के लिए बेहद गर्व की बात है और इससे गया घराना ईश्वरपुर का नाम विश्व स्तर पर और मजबूत हुआ है।
ईश्वरपुर को संगीतकारों के गांव के रूप में जाना जाता है। करीब 300 घरों वाले इस गांव में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक संगीत से जुड़े लोग मिलते हैं। यहां तबला, हारमोनियम, ध्रुपद और ख्याल गायकी की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। अमेरिका, थाईलैंड और मॉरीशस समेत कई देशों में गांव के संगीतज्ञ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
गांव के इतिहास की बात करें तो करीब 300 से 400 वर्ष पहले राजस्थान से आए गौड़ ब्राह्मणों ने यहां संगीत की परंपरा को स्थापित किया। मान्यता है कि 17वीं शताब्दी में ईश्वरपुर के संगीतकारों ने टिकारी महाराज के एक हाथी को संगीत के माध्यम से ठीक किया था। इससे प्रसन्न होकर महाराज ने करीब 700 एकड़ जमीन गांव को इनाम में दी थी।
पंडित कृष्ण मोहन पाठक का राष्ट्रीय सम्मान इसी समृद्ध संगीत परंपरा को नई पहचान देने वाला ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।





