बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल रेलवे स्टेशन से आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थस्थल तिरुपति तक नई साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन सेवा को रेल मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। ट्रेन संख्या 17433 (तिरुपति-रक्सौल) और 17434 (रक्सौल-तिरुपति) के रूप में यह सेवा अप्रैल 2027 से शुरू होने की संभावना है। इससे बिहार और नेपाल सीमा क्षेत्र के लाखों यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों को अब तक काफी परेशानी होती थी, लेकिन इस ट्रेन के शुरू होने से सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। पहले यात्रियों को चेन्नई, मुंबई या अन्य बड़े जंक्शनों से ट्रेन बदलनी पड़ती थी, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे।
करीब 2,800 किलोमीटर लंबी यह यात्रा 48-50 घंटे में पूरी होगी। ट्रेन मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पटना, गया, दुर्ग, रायपुर, विजयवाड़ा और रेनिगुंटा जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इसमें एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर और जनरल कोच सहित लगभग 20 डिब्बे होंगे, जिनमें 1,500 से अधिक यात्री सफर कर सकेंगे। साथ ही बायो-टॉयलेट, पैंट्री कार, वाई-फाई और चार्जिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी।
तिरुपति जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आरक्षण कोटा भी रखा जाएगा। स्लीपर का किराया लगभग 800-1000 रुपये और एसी का 2000-3500 रुपये के बीच रहने की संभावना है, जो मौजूदा विकल्पों से सस्ता होगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह 15 साल पुरानी मांग थी। इससे न केवल तीर्थयात्रा आसान होगी, बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। खासकर विजयवाड़ा जैसे बाजारों से सीधा संपर्क बनने से चंपारण के कृषि उत्पादों को नए अवसर मिलेंगे।
हालांकि, कुछ तकनीकी चुनौतियां भी हैं, जैसे रक्सौल-मुजफ्फरपुर रूट का अधूरा विद्युतीकरण और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र। इसके बावजूद यह ट्रेन सेवा क्षेत्र के विकास और बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
