पटना में आयोजित मगही महोत्सव में इस बार संस्कृति, सिनेमा और संगीत का अनोखा संगम प्रस्तुत किया गया। महोत्सव के दौरान आयोजित मगही लघु फिल्म निर्माण प्रतियोगिता के पुरस्कारों की घोषणा की गई, जिसमें दिसंबर 2025 में सर्वश्रेष्ठ 48 फिल्मों को आमंत्रित किया गया। पुराने मंडल में मशहूर पटकथा लेखक शैबल जी, निर्देशक अभिलाष शर्मा और अभिनेता बुल्लू कुमार शामिल हैं।
प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार ‘दोस्ती’ फिल्म का मिलान हुआ, जिसमें ग्रामीण परिवेश में लड़कियों की शिक्षा के महत्व को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है। द्वितीय स्थान ‘एक कप की चाहत’ को मिला, जो महिलाओं के जीवन पर ध्यान केंद्रित करती है, जबकि तृतीय पुरस्कार ‘आशाएं’ को मिला, जो भाई-बहन के सम्मान को खो देती है। इसके अलावा ‘लॉस्ट’, ‘शहर से निमन गांव’ और ‘बनकी’ को प्रशंसा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। स्नातक को डॉ. कुमार राजेश रानू सहित कई बिल्डरों ने पद संभाला।
फेस्टिवल के दूसरे दिन संगीत और परंपरा का रंग भी देखने को मिला। घराने के गायक राजन सिजुआर ने पुरबिया गायकी और ठुमरी में घराने के योगदान के तहत संगीत शिक्षा के विस्तार को जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार के हर मंडल में संगीत गुरुकुल की स्थापना की जाए, ताकि नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जा सके।
कार्यक्रम में मगही सिनेमा के इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर भी गंभीर चर्चा हुई। अभिनेता अली खान ने कहा कि मगही सिनेमा को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। वहीं, शैबल जी ने बताया कि पहली मगही फिल्म ‘भैया’ 1961 में बनी थी, लेकिन इसके बाद अनाधिकारिक की कमी हो गयी।
फिल्म इतिहासकार प्रो. रविकांत ने डिजिटल युग में मगही कहानी को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि 1930 में भी मगही में फिल्म निर्माण का प्रयास किया गया था, लेकिन संरक्षण की कमी अब तक उपलब्ध नहीं है।
फेस्टिवल ने केवल नई प्रतिभाओं को मंच दिया, बल्कि मगही भाषा और संस्कृति के संरक्षण और विकास का मजबूत संदेश भी दिया।
