सहरसा शहर के पटेल मैदान में रामनवमी के दूसरे दिन पारंपरिक घुड़सवारी रेस का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कुल 48 घुड़सवारों ने हिस्सा लिया, जहां बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शकों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। पूरे मैदान में रोमांच और उत्साह का माहौल देखने को मिला।
मेला कमेटी के अध्यक्ष रमेश यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि पटेल मैदान में घुड़दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन वर्ष 1981 से लगातार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक जागरूकता फैलाना और पुरानी परंपराओं को जीवित रखना है। यही वजह है कि यह आयोजन अब सहरसा और आसपास के क्षेत्रों की पहचान बन चुका है।
उन्होंने आगे बताया कि रामनवमी के अवसर पर दूर-दराज से घुड़सवार श्रद्धालु शहर में निकलने वाली शोभा यात्रा में शामिल होते हैं। इसके अगले दिन पटेल मैदान में घुड़दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जो इस पूरे पर्व का मुख्य आकर्षण होता है।
इस बार प्रतियोगिता में दो प्रकार की रेस आयोजित की गई। पहली रेस ‘चाल’ थी, जिसमें घोड़े धीमी गति से चलते हुए संतुलन और सवार के नियंत्रण का प्रदर्शन करते हैं। वहीं दूसरी रेस तेज रफ्तार की थी, जिसे स्थानीय भाषा में ‘फरदेवाल’ कहा जाता है। इस रेस में घोड़ों की गति और सवारों की कुशलता ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
प्रतियोगिता में शामिल 48 घुड़सवारों में से कुल 6 प्रतिभागियों को विजेता घोषित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर मेला कमेटी की ओर से विजेताओं को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
सहरसा में हर वर्ष आयोजित होने वाली यह घुड़दौड़ प्रतियोगिता न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुकी है।
