पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह ने शनिवार को सहरसा में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बिहार और राष्ट्रीय राजनीति को लेकर कई अहम बयान दिए। उन्होंने जदयू की हालिया राजनीतिक परिस्थितियों, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका और पार्टी के भविष्य को लेकर खुलकर अपनी राय रखी।
प्रेस वार्ता में आनंद मोहन ने कहा कि राज्यसभा नामांकन से जुड़े फैसलों के बाद प्रदेश के दलित, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग में भारी आक्रोश देखने को मिला था। उन्होंने दावा किया कि उस समय जदयू समर्थकों के बीच गहरा असंतोष था और अल्पसंख्यक समाज में भी भय मिश्रित नाराजगी का माहौल बन गया था।
उन्होंने कहा कि इस आक्रोश को शांत करने के लिए दो बड़े कदम उठाए गए—पहला, निशांत कुमार को जदयू से जोड़ना और दूसरा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का “समृद्धि यात्रा” पर निकलना। आनंद मोहन के अनुसार इन दोनों कदमों ने “शॉक ऑब्जर्वर” की तरह काम किया और कार्यकर्ताओं के गुस्से को ठंडा करने में बड़ी भूमिका निभाई।
नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक रूप से सही ठहराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन राजनीति समझने वाले लोग इसे डिमोशन के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अचानक लिए गए फैसलों ने एनडीए को भी नुकसान पहुंचाया है और यदि अभी चुनाव हो जाए तो विपक्ष को बढ़त मिल सकती है।
आनंद मोहन ने कहा कि पिछड़ा, अति पिछड़ा और दलित मतदाता आज भी भाजपा को अपनी स्वाभाविक पार्टी नहीं मानते हैं और पहले नीतीश कुमार के चेहरे से ही भाजपा को लाभ मिलता था। लेकिन हालिया रणनीतियों और “कथित योजनाकारों” के फैसलों ने इन वर्गों में भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचाया है।
मुख्यमंत्री पद को लेकर उन्होंने कहा कि यदि भाजपा की ओर से नया चेहरा सामने लाया जाता है तो लव-कुश समाज से किसी मजबूत नेता को आगे करना चाहिए। उन्होंने सम्राट चौधरी को इस वर्ग का उपयुक्त विकल्प बताया। साथ ही उपमुख्यमंत्री पद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार यह पद “चुप मुख्यमंत्री” जैसा हो जाता है, जहां निर्णय लेने की शक्ति सीमित रहती है।
जदयू के भविष्य पर बोलते हुए आनंद मोहन ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और युवाओं की इच्छा है कि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में आएं। उनका मानना है कि यदि नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो निशांत कुमार को पूर्ण अधिकार और जिम्मेदारी के साथ नेतृत्व सौंपना चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नीतीश कुमार को अपने राजनीतिक भविष्य और भूमिका को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय करनी चाहिए, ताकि कार्यकर्ताओं और जनता के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।
