बिहार के मुख्यमंत्री ने गुरुवार को आवासीय क्षेत्र के दौरान अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ की, जहां उन्होंने करीब 810 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान बिहारशरीफ में नवनिर्मित कस्टमोफिट का उद्घाटन किया गया, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके बाद मुख्यमंत्री दीपनगर स्टेडियम, जहां से उन्होंने कई अन्य समितियों की शुरुआत की।
कार्यक्रम के दौरान एक दिलचस्प राजनीतिक संदेश भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने मुख्यमंत्री से दिल्ली नहीं जाने की अपील की। वहीं, कुछ लोगों ने ‘बिहार का मुख्यमंत्री कैसा हो, निशांत कुमार ऐसा हो’ के नारे लगाते हुए अपने बेटों को मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी की।
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की मंजूरी में कहा कि पहले प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम विवाद के बीच बात हुई थी, लेकिन उनकी सरकार के बाद सामाजिक सौहार्द मजबूत हुआ। उन्होंने बताया कि कब्रिस्तानों की घेराबंदी के साथ-साथ मंदिर-मठों की सुरक्षा पर भी काम किया गया। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार का ज़िक्र करते हुए उन्होंने नए मेडिकल कॉलेजों और स्कूलों की बहाली को अहम कदम बताया।
महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीविका समूह के माध्यम से महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है और अब वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2024 से शहरी क्षेत्र में भी इस योजना का विस्तार किया गया है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के सहयोग की जिम्मेदारी निभाते हुए प्रधानमंत्री का लाॅकडाउन बढ़ाया। उन्होंने कहा कि केंद्र के सहयोग से बिहार में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं।
अपने भाषण के अंत में नीतीश कुमार ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकास तभी संभव है, जब समाज में शांति और भाईचारा रहेगा। साथ ही लोगों से सरकारी मंजूरी का लाभ बढ़ाएं और विकास में सहयोग करने की अपील भी करें।
