पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव का असर अब भारत के शराब और बीयर उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है. कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने उद्योग की लागत को काफी बढ़ा दिया है. इस स्थिति को देखते हुए देश के प्रमुख उद्योग निकायों— और —ने राज्य सरकारों से शराब की कीमतों में तुरंत 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मांग की है.

उद्योग जगत का कहना है कि संकट की जड़ कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में आई अस्थिरता है, जिसका सीधा असर शराब उत्पादन और पैकेजिंग पर पड़ रहा है. बोतल, कैन, लेबल और ट्रांसपोर्टेशन जैसी लागतें तेजी से बढ़ी हैं. CIABC के महानिदेशक अभिनव गिरी के अनुसार, कच्चे माल की लागत अब “असहनीय” स्तर तक पहुंच चुकी है, जिससे कंपनियों पर भारी दबाव बन गया है.

वहीं BAI के महानिदेशक विनोद गिरी ने चेतावनी दी है कि कई राज्यों में बीयर कंपनियां पहले से ही घाटे में चल रही हैं. अगर सरकार ने जल्द कीमतों में संशोधन नहीं किया, तो कई कंपनियों के लिए अपना संचालन जारी रखना मुश्किल हो सकता है. इसका सीधा असर उत्पादन और सप्लाई पर पड़ेगा.

शराब उद्योग भारत सरकार के लिए एक बड़ा राजस्व स्रोत है, जो हर साल लगभग 5.50 लाख करोड़ रुपये का योगदान देता है. ऐसे में अगर कीमतों में वृद्धि नहीं की गई, तो उत्पादन घटने और बाजार में कमी आने की आशंका है. इससे न केवल उपभोक्ताओं को परेशानी होगी, बल्कि सरकार के राजस्व पर भी गंभीर असर पड़ सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो देश में शराब की उपलब्धता पर संकट गहरा सकता है. इसलिए उद्योग निकायों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की है, ताकि बाजार संतुलन और आपूर्ति व्यवस्था बनी रहे।

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