(बिहार): ‘रक्तदान महादान’ की कहावत जिले के तीन दोस्तों-नीरज कुमार, बलवीर चंद्रवंशी और नवीन सिंह-ने सच कर दिखाई गई है। इन तीनों ने मिलकर अब तक करीब 10 हजार शिलालेखों तक का दावा किया है और 93 से अधिक बार स्वयं मूर्तियां बना ली हैं। बात यह है कि इसका ब्लड ग्रुप O रिसेप्टर है, जो बेहद दुर्लभ माना जाता है।
नीरज कुमार की कहानी सबसे दिलचस्प है। 14 साल पहले उनकी बहन की मौत के समय खून से नहीं मिली थी मुलाकात। इसी घटना ने उन्हें झकझोर दिया और उन्होंने अपने जीवन का मिशन बना लिया। अब तक वे 57 बार बेंचमार्क कर चुके हैं और 150 से अधिक बार बेंचमार्क बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उनके इस सामाजिक कार्य के लिए 2017 में राष्ट्रपति पद के लिए नामांकित व्यक्ति का भी भुगतान किया गया है।
बलवीर चंद्रवंशी ने शुरुआत में तो तराजू से दूरी बना ली थी, लेकिन 6 महीने की बच्ची की जान जाने के बाद उनकी सोच बदल गई। अब तक वे 23 बार वोट कर चुके हैं और हर साल कम से कम दो बार वोट करने का संकल्प खेल रहे हैं।
तीसरे दोस्त नवीन सिंह ने कोरोना काल में पहली बार वोटिंग की। दिल्ली में एक दोस्त की पत्नी को ओ लेवल ब्लड की जरूरत थी, लेकिन कहीं नहीं मिला। दोस्तों की प्रेरणा से उन्होंने टेबल पर लगातार इस आकांक्षा से जुड़े हुए हैं।
इन तीनों ने मिलकर ‘शहीद भगत सिंह स्मारक’ संस्था बनाई, जिसके जरिए 500 से ज्यादा प्लांट लगाए गए। ये लोग बिना किसी फंड या चंदे के खुद के प्रयास से सेवा कार्य कर रहे हैं।
अब इस ग्रुप में एक पूर्व सैनिक प्रवेश कुमार भी शामिल हुए हैं, जो 7 बार शेयर कर चुके हैं।
इन दोस्तों का उद्देश्य है कि वे 50 हजार लोगों की मदद करें और समाज में अधिक से अधिक लोगों को प्रेरित करें।
