मिडिल ईस्ट में जारी ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच संघर्ष ने वैश्विक हालात को गंभीर बना दिया है। करीब 27 दिनों से चल रहे इस युद्ध का असर न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। तेल और गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम लोगों से लेकर बड़े देशों तक पर दबाव बढ़ा है।
इस युद्ध में सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ अमेरिका पर पड़ रहा है। अब तक अमेरिका लगभग 28.5 अरब डॉलर खर्च कर चुका है, यानी रोजाना करीब 1.19 अरब डॉलर। बढ़ते खर्च को देखते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने सरकार से 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त मांग की है। इसी बीच अमेरिकी कर्ज भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। कांग्रेस बजट कार्यालय (CBO) के अनुसार, अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 39 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो चुका है, जो उसकी GDP का लगभग 124% है। हर साल करीब 900 बिलियन डॉलर सिर्फ ब्याज चुकाने में जा रहे हैं।
वहीं इजराइल भी इस युद्ध में भारी खर्च कर रहा है। शुरुआती 20 दिनों में ही उसका खर्च 6.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया। औसतन वह प्रतिदिन करीब 30 करोड़ डॉलर युद्ध पर खर्च कर रहा है। सरकार ने पहले ही 12.5 अरब डॉलर का बजट इस युद्ध के लिए तय कर रखा है।
हथियारों की बात करें तो अमेरिका ने ट्राइडेंट II बैलिस्टिक मिसाइल, GBU-57 बंकर बस्टर बम और M4/M4A1 कार्बाइन जैसे अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है। वहीं इजराइल ने F-15 और F-16 लड़ाकू विमान, अपाचे हेलीकॉप्टर, जेरिको मिसाइल और हारोप ड्रोन का प्रयोग किया।
दूसरी ओर, ईरान भी अपनी ताकत दिखा रहा है। उसने फतह-2 हाइपरसोनिक मिसाइल, शाहब-3, खैबर शेकान और शाहिद-136 ड्रोन जैसे हथियारों से जवाबी हमले किए हैं।
कुल मिलाकर यह युद्ध सिर्फ सैन्य टकराव नहीं, बल्कि आर्थिक और वैश्विक स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
