बिहार की राजनीति में आए बड़े बदलाव ने सिर्फ पटना ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की सियासत में भी हलचल बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच यह अटकलें तेज हो गई हैं कि बिहार में अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी का हो सकता है। इस संभावित बदलाव को लेकर बीजेपी के भीतर मंथन जारी है और कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है।

 

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर बिहार में किसी ओबीसी चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो उसका असर पड़ोसी उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। यूपी के बीजेपी नेताओं का मानना है कि बिहार में ओबीसी नेता को आगे लाने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुशवाहा, मौर्य, सैनी और शाक्य जैसे पिछड़े वर्गों के वोटरों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

 

दरअसल, उत्तर प्रदेश में मौजूदा सरकार का नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं, जो ठाकुर समुदाय से आते हैं। ऐसे में बिहार में ओबीसी मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में बीजेपी को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी सामाजिक समीकरण मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

 

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के एक बीजेपी नेता ने कहा कि पार्टी 2017 से यूपी में सत्ता में है और अब लगभग एक दशक की एंटी-इनकंबेंसी का सामना भी करना पड़ सकता है। इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के कारण मिली चुनौतियां और ब्राह्मण वोटरों की नाराजगी भी आगामी विधानसभा चुनाव में अहम मुद्दा बन सकती है।

 

बिहार में इस समय चर्चा है कि नीतीश कुमार की जगह किसी कुर्मी, कुशवाहा या अत्यंत पिछड़े वर्ग (EBC) के नेता को मौका दिया जा सकता है। ऐसे में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है, जो कुशवाहा समुदाय से आते हैं।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार के इस घटनाक्रम का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, चंदौली और सोनभद्र जैसे जिलों की करीब 41 विधानसभा सीटों पर भी पड़ सकता है, जहां ओबीसी वोटरों की बड़ी भूमिका मानी जाती है।

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