बाल यौन शोषण के गंभीर आरोपों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विशेष पॉक्सो जज विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर प्रयागराज के झूंसी थाने में मामला दर्ज किया गया। अदालत ने यह निर्देश आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत और पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद दिया।
अदालत के आदेश के कुछ ही घंटों बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान सामने आया। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और झूठा करार दिया। स्वामी ने कहा कि एफआईआर दर्ज होना एक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और अब निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है।
स्वामी ने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया। उनका दावा है कि आरोप लगाने वाला व्यक्ति आपराधिक पृष्ठभूमि वाला है और झूठे मुकदमे दर्ज कर धन उगाही करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता ने स्वयं को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का शिष्य बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण जैसे मुद्दों पर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
स्वामी के शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने भी आरोपों को साजिश करार दिया और कहा कि यह शंकराचार्य परंपरा को बदनाम करने का प्रयास है। उन्होंने मांग की कि अदालत सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर निष्पक्ष सुनवाई करे।
फिलहाल मामला न्यायालय की निगरानी में है और आगे की जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जाएगी।
