भागलपुर में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की ओर से 100 दिवसीय “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई। यह अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित डीएलएसए कार्यालय में किया गया, जहां न्यायिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

 

अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाना और लोगों को संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेष रूप से बालिकाओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर इसका गंभीर असर पड़ता है, जिससे उनका संपूर्ण जीवन प्रभावित होता है।

 

अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं। किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना टोल-फ्री हेल्पलाइन 15100 या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दी जा सकती है। सूचना मिलते ही संबंधित विभाग त्वरित कार्रवाई कर विवाह को रोकने का प्रयास करेगा। इसके साथ ही पंचायत स्तर तक जागरूकता कार्यक्रम चलाकर अभिभावकों को समझाने और कानून की जानकारी देने की योजना बनाई गई है।

 

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि केवल कानून से बाल विवाह नहीं रुकेगा, बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाना आवश्यक है। इसके लिए स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। अभियान के तहत आने वाले दिनों में गांवों और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता रैलियां, विधिक साक्षरता शिविर, नुक्कड़ नाटक और परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

 

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से भागलपुर को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकता है और बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य प्रदान किया जा सकेगा।

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