बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान के तहत शुक्रवार को निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज (ICDS) की जिला परियोजना अधिकारी (DPO) अनीता कुमारी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। यह रकम किसी बड़ी डील का हिस्सा बताई जा रही है।

 

मिली जानकारी के अनुसार, कर्मचारी राजू ने निगरानी विभाग से शिकायत की थी कि उनसे काम के बदले रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत की सत्यता जांचने के बाद निगरानी टीम ने जाल बिछाया और तय योजना के तहत छापेमारी की। जैसे ही अनीता कुमारी ने 50 हजार रुपये की रिश्वत की रकम ली, टीम ने उन्हें मौके पर ही धर दबोचा।

 

बताया जा रहा है कि अनीता कुमारी पहले भी विवादों में रह चुकी हैं। बनमनखी की सीडीपीओ और पूर्णिया की प्रभारी डीपीओ के रूप में कार्यकाल के दौरान उन पर गबन, अवैध उगाही और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे थे। कटिहार जिले में तत्कालीन डीपीओ की रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और पुलिस ने आरोप पत्र भी दाखिल किया था।

 

कटिहार में लगातार उठ रहे आरोपों के बीच उनका तबादला बनमनखी कर दिया गया था। हालांकि, वहां भी अनियमित आंगनबाड़ी केंद्र संचालन और कथित दलालों के प्रभाव की शिकायतें सामने आईं। स्थानीय स्तर पर शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचीं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे उन्हें पूर्णिया डीपीओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया, जिससे उनके रसूख की चर्चा और तेज हो गई।

 

बाद में विभागीय जांच के आधार पर उन्हें निलंबित किया गया, लेकिन किशनगंज में पदभार ग्रहण करने के बाद भी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे। आखिरकार निगरानी विभाग की कार्रवाई में वह फंस गईं।

 

फिलहाल निगरानी टीम उनसे पूछताछ कर रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश गया है।

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