शराबबंदी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, अवैध शराब केस में 19 वर्षीय आरोपी को अग्रिम जमानतबिहार में शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन को लेकर पटना हाई कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। गोपालगंज के विशंभरपुर थाना कांड संख्या 25/2025 में दर्ज अवैध शराब मामले में 19 वर्षीय आरोपी कृपा साहनी को अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी। जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह राहत प्रदान की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य में शराबबंदी के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद अवैध शराब का कारोबार बढ़ रहा है और 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। मिथाइल अल्कोहल युक्त जहरीली शराब के घातक प्रभावों का उल्लेख करते हुए अदालत ने इसे गंभीर सामाजिक संकट करार दिया।
प्राथमिकी के अनुसार पुलिस ने मटिहानिया पुल के पास एक लावारिस मोटरसाइकिल से 55.800 लीटर अवैध शराब बरामद की थी। वाहन आरोपी के नाम से पंजीकृत बताया गया। चौकीदार के बयान के आधार पर आरोपी का नाम सामने आया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि घटना के समय आरोपी मौके पर मौजूद नहीं था और सह-आरोपी वाहन चला रहा था। राज्य की ओर से जमानत का विरोध किया गया, बावजूद इसके अदालत ने चार सप्ताह के भीतर समर्पण की शर्त पर 10 हजार रुपये के मुचलके पर अग्रिम जमानत दे दी।
अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि युवाओं के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और संविधान के अनुच्छेद 47 की भावना के अनुरूप कार्य सुनिश्चित हो।
वहीं एक अन्य मामले में पटना हाई कोर्ट ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की। 17 फरवरी 2026 की बालसा रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने इलाज व संसाधनों की कमी पर सवाल उठाए।
14 फरवरी 2026 को चीफ जस्टिस समेत न्यायाधीशों और अधिकारियों ने कोईलवर स्थित बिहार स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड एलाइड साइंसेज का निरीक्षण भी किया, जिसके बाद अदालत ने व्यवस्था में सुधार के संकेत दिए हैं।
