बिहार के सहरसा जिले में एक बार फिर मध्याह्न भोजन योजना की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला नौहट्टा प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय जोड़ी का है, जहां बच्चों ने एनजीओ द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे भोजन का बहिष्कार कर दिया है।

 

छात्रों का आरोप है कि उन्हें निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिया जाता और खाने की गुणवत्ता भी बेहद खराब रहती है। बच्चों का कहना है कि कई बार भोजन करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ चुकी है, जिसके चलते उन्होंने स्कूल का खाना लेना बंद कर दिया है। यही वजह है कि अब अधिकांश बच्चे मध्याह्न भोजन के समय स्कूल से घर लौटकर भोजन करना बेहतर समझते हैं।

 

स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों के अनुसार, नौहट्टा प्रखंड के कई अन्य विद्यालयों में भी यही स्थिति बनी हुई है। पूछे जाने पर बच्चे बताते हैं कि एनजीओ द्वारा दिया गया भोजन न तो स्वादिष्ट होता है और न ही स्वास्थ्य के लिहाज से भरोसेमंद। स्थिति यह है कि मध्य विद्यालय जोड़ी में प्रतिदिन भेजा गया भोजन बच जाता है और अंततः उसे फेंकना पड़ता है, जिससे संसाधनों की बर्बादी भी हो रही है।

 

इस पूरे मामले पर एमडीएम प्रभारी उज्ज्वल कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया मेन्यू में ही गड़बड़ी नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि 15 फरवरी 2025 से मेन्यू में बदलाव किया गया था, लेकिन विद्यालय स्तर पर उसे लागू नहीं किया गया, जो अपने आप में संदिग्ध है। उन्होंने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

 

गौरतलब है कि हाल ही में पतरघट में भी गुणवत्ताहीन मध्याह्न भोजन खाने से लगभग दो दर्जन बच्चे बीमार पड़ गए थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है और योजना की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि इस मुद्दे को पहले भी कई बार उठाया गया, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग और प्रशासन मध्याह्न भोजन योजना को लेकर कितनी सख्ती दिखाते हैं और बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक व गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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