भागलपुर के पीरपैंती प्रखंड अंतर्गत हरिनकोल पंचायत के छोटी दिलौरी गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय छोटी दिलौरी आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव का दंश झेल रहा है। हैरत की बात यह है कि विद्यालय की स्थापना को लगभग 30 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक स्कूल तक पहुंचने के लिए एक पक्की सड़क तक का निर्माण नहीं हो सका है। बरसात हो या बाढ़, हर मौसम में छोटे-छोटे बच्चे, शिक्षक और अभिभावक खेतों और कीचड़ भरी पगडंडियों से होकर जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि फिसलकर गिरना, कपड़े खराब होना और चोट लगना यहां आम बात हो गई है। बावजूद इसके बच्चों की पढ़ने की ललक उन्हें हर दिन इस कठिन रास्ते से गुजरने पर मजबूर करती है। लोगों का दर्द यह है कि वर्षों में सरकारें बदलीं, मुखिया बदले, जनप्रतिनिधि बदले—लेकिन छोटी दिलौरी गांव और विद्यालय की हालत नहीं बदली।
विद्यालय में पेयजल की स्थिति भी चिंताजनक है। सरकारी चापाकल तो उपलब्ध है, लेकिन उससे अत्यधिक आयरन युक्त पानी निकलता है। मजबूरी में बच्चे वही पानी पीते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।
सुरक्षा के लिहाज से भी विद्यालय की स्थिति गंभीर है। स्कूल की चारदीवारी पूरी तरह जर्जर होकर टूट चुकी है। रात के समय असामाजिक तत्व स्कूल परिसर में घुस जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार शौचालयों में तोड़फोड़ की जाती है, परिसर में गंदगी फैलाई जाती है और गुटखा खाकर स्कूल को गंदा किया जाता है। कई बार बच्चों को शौच के लिए स्कूल से बाहर जाना पड़ता है, जो सुरक्षा और स्वच्छता दोनों के लिए खतरनाक है।
विद्यालय के शिक्षक सुनील कुमार यादव, बरुण पासवान और शिक्षिका श्रेया चौधरी ने प्रशासन से मांग की है कि मजबूत चारदीवारी का निर्माण कराया जाए और स्वच्छ, सुरक्षित शौचालय उपलब्ध कराए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि एक साल पहले तक स्कूल की हालत बेहद खराब थी, लेकिन शिक्षिका श्रेया चौधरी के आने के बाद बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और पढ़ाई का स्तर बेहतर हुआ है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूल तक तत्काल पक्की सड़क बनाई जाए, शुद्ध पेयजल, चारदीवारी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी सुरक्षित और सम्मानजनक शिक्षा मिल सके।
