भागलपुर से भारतीय सेना के जांबाज और शौर्य के प्रतीक लेफ्टिनेंट अरुण कुमार के सम्मान में सुल्तानगंज में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद जैसे ही लेफ्टिनेंट अरुण कुमार सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पहुंचे, पूरा स्टेशन परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया।

 

कारगिल युद्ध, अनंतनाग ऑपरेशन और ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में अपनी बहादुरी और नेतृत्व क्षमता का परिचय देने वाले लेफ्टिनेंट अरुण कुमार के स्वागत के लिए स्टेशन पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। सैनिक संगठनों, स्थानीय युवाओं और आम नागरिकों ने फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और “भारत माता की जय” तथा “वंदे मातरम्” के नारों के साथ उनका भव्य अभिनंदन किया।

 

इस स्वागत समारोह की सबसे खास बात यह रही कि दर्जनों घोड़ों के साथ लोग स्टेशन परिसर पहुंचे, जिससे पूरा माहौल किसी ऐतिहासिक उत्सव जैसा नजर आया। हर कोई अपने वीर सपूत की एक झलक पाने को उत्साहित दिखा। देशभक्ति गीतों और नारों के बीच लेफ्टिनेंट अरुण कुमार का काफिला जब आगे बढ़ा, तो लोगों की आंखों में गर्व और सम्मान साफ झलक रहा था।

 

इस अवसर पर लेफ्टिनेंट अरुण कुमार ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें करीब 30 वर्षों तक भारतीय सेना में रहकर देश की सेवा करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन सभी सैनिकों का है जो देश की रक्षा के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका सफर थमेगा नहीं।

 

लेफ्टिनेंट अरुण कुमार ने कहा कि अब वे समाज सेवा के माध्यम से देश के लिए अपना योगदान देंगे और युवाओं को देशभक्ति, अनुशासन और सेवा की प्रेरणा देते रहेंगे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

 

सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर हुआ यह भव्य स्वागत समारोह न केवल एक वीर सैनिक के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि देश अपने जांबाज सपूतों को कभी नहीं भूलता और उनका सम्मान हमेशा करता रहेगा।

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