भागलपुर के बहुचर्चित फर्जी शपथपत्र और अवैध भूमि नामांतरण मामले में पुलिस की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मृत महिला को कागजों में जीवित दिखाकर फर्जी शपथपत्र के माध्यम से जमीन के दाखिल-खारिज का यह मामला जगदीशपुर थाना कांड संख्या 03/26 से जुड़ा है, जिसमें एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

 

इस मामले के सूचक सैयद ऐनाम उद्दीन ने पूर्वीय प्रक्षेत्र भागलपुर के पुलिस महानिरीक्षक को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच, विशेष जांच दल यानी SIT के गठन और मुख्य अभियुक्त मो. इस्लाम समेत अन्य संलिप्त लोगों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। सूचक का आरोप है कि पुलिस जानबूझकर कार्रवाई में देरी कर रही है, जिससे आरोपियों को साक्ष्य मिटाने और कानूनी दांव-पेंच अपनाने का मौका मिल गया।

 

सूचक के अनुसार, सदर एसडीओ के आदेश पर 4 जनवरी 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बावजूद 21 जनवरी को जब पुलिस अभियुक्त के घर पहुंची, तो बिना किसी चिकित्सकीय जांच के “बीमारी” का हवाला स्वीकार कर लिया गया और गिरफ्तारी नहीं की गई। इसके बाद 30 जनवरी को पुलिस जब मोजाहिदपुर थाना क्षेत्र के गनीचक स्थित आवास पर पहुंची, तो अभियुक्त ने कोर्ट से प्राप्त “नो-कोर्सिव एक्शन” का आदेश दिखा दिया, जिससे पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।

 

हैरानी की बात यह है कि इस संगीन मामले में बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा द्वारा सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या पुलिस की सुस्ती महज लापरवाही है या किसी स्तर पर आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है।

 

सूचक ने अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका जताई है। उनका कहना है कि एसएसपी को आवेदन देने के बावजूद अब तक सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई है। इधर, आईजी विवेक कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की जिम्मेदारी सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह को सौंपी है और जल्द समीक्षा की बात कही है।

 

अब देखना यह होगा कि क्या SIT का गठन कर इस संगठित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होता है या मामला यूं ही फाइलों में दबा रह जाता है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *