भागलपुर में उच्च न्यायालय की खंडपीठ की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन किया और हाईकोर्ट के अध्यक्ष, यानी मुख्य न्यायाधीश को संबोधित करते हुए अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन प्रस्तुत किया।

 

धरने के दौरान अधिवक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि भागलपुर जैसे ऐतिहासिक, प्रशासनिक और न्यायिक महत्व वाले शहर में अब हाईकोर्ट की खंडपीठ की स्थापना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भागलपुर प्रमंडल के अंतर्गत कई जिले आते हैं, जहां से रोजाना सैकड़ों की संख्या में मामले पटना हाईकोर्ट तक पहुंचते हैं। इस कारण न सिर्फ आम जनता को बल्कि अधिवक्ताओं को भी भारी आर्थिक, शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 

अधिवक्ताओं ने कहा कि लंबी दूरी तय कर पटना जाना, बार-बार तारीखों पर खर्च उठाना और समय की बर्बादी के चलते न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। कई बार आर्थिक रूप से कमजोर लोग मुकदमे लड़ने से ही पीछे हट जाते हैं, जिससे न्याय तक उनकी पहुंच सीमित हो जाती है। ऐसे में भागलपुर में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित होना बेहद जरूरी है।

 

धरने में शामिल वकीलों ने यह भी कहा कि यदि भागलपुर में खंडपीठ की स्थापना होती है तो इससे त्वरित और सुलभ न्याय सुनिश्चित होगा। साथ ही पटना हाईकोर्ट पर बढ़ते मामलों का बोझ भी कम किया जा सकेगा। स्थानीय स्तर पर कानूनी सुविधाओं का विस्तार होगा और आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत बनेगा।

 

अधिवक्ताओं ने कहा कि भागलपुर पहले से ही एक बड़ा न्यायिक केंद्र रहा है। यहां जिला न्यायालय के साथ-साथ कई अन्य न्यायिक संस्थान सक्रिय हैं। खंडपीठ की स्थापना के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना, अधिवक्ता समुदाय और न्यायिक वातावरण पहले से ही मौजूद है, ऐसे में अब और देरी का कोई औचित्य नहीं है।

 

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने बैनर और पोस्टरों के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

 

अंत में अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट के अध्यक्ष से अपील की कि वे भागलपुर की जनता और वकील समुदाय की भावनाओं को समझें और यहां हाईकोर्ट की खंडपीठ की स्थापना की दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठाएं, ताकि न्याय व्यवस्था को और अधिक सुलभ, सरल और प्रभावी बनाया जा सके।

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