सहरसा जिले के कृषि विज्ञान केंद्र, अगवानपुर से एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है, जिसने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पूरा मामला वित्तीय वर्ष 2024–25 में संचालित जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत किसानों को मक्का और मूंग की खेती के लिए बीज, दवा और जुताई की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जानी थी।

 

योजना के तहत मक्का की खेती 219 एकड़ और मूंग की खेती 250 एकड़ भूमि पर कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच में पाया गया कि मक्का बीज वितरण में करीब 50 किसानों के नाम मृत या फर्जी पाए गए हैं। वहीं, मूंग बीज वितरण में 11 मृत किसानों के नाम दर्ज हैं और लगभग 50 किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर योजना का लाभ उठाने का दावा किया गया है।

 

इस पूरे मामले की जांच के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, सबौर भागलपुर से एक जांच टीम भेजी गई है। गौर करने वाली बात यह है कि यही टीम 5 से 6 महीने पहले भी जांच कर चुकी थी, लेकिन अब तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई। 29 जनवरी को जांच टीम शिकायतकर्ता जयशंकर सिंह के आवास पर पहुंची, जहां उनसे घंटों पूछताछ की गई। जयशंकर सिंह ने केवीके अगवानपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान पर बड़े स्तर पर वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं।

 

जांच में यह भी सामने आया है कि मूंग की बुवाई के लिए ट्रैक्टर और कोटेशन भागलपुर से मंगाए गए, जबकि सहरसा जिला और पूरी कोसी प्रमंडल में स्थानीय संसाधन आसानी से उपलब्ध थे। इससे यह आशंका और गहराती है कि पूरे घोटाले की साजिश पहले से रची गई थी।

 

स्थलीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वास्तविक किसानों को बीज नहीं देकर मृत व्यक्तियों और फर्जी नामों के सहारे बीज उठाव दिखाया गया, जिससे सरकारी योजना का लाभ केवल कागजों तक ही सीमित रह गया। जांच पदाधिकारी ने जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में केवीके अगवानपुर के प्रधान एवं वरीय वैज्ञानिक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है।

 

अब बड़ा सवाल यह है कि इस गंभीर घोटाले पर प्रशासन कब तक ठोस कदम उठाता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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