पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में आखिरकार पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला है। पटना के एसएसपी ने पूरे मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में दो पुलिस पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई घटना के करीब 18 दिनों बाद की गई है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा एक्शन माना जा रहा है। एसएसपी ने यह फैसला फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट मिलने के बाद लिया है।

 

पटना एसएसपी ने चित्रगुप्तनगर थाना कांड संख्या 14/26 की समीक्षा के बाद कदमकुआं थाना में पदस्थापित अवर निरीक्षक हेमंत झा और चित्रगुप्तनगर थानाध्यक्ष अवर निरीक्षक रोशनी कुमारी को सस्पेंड कर दिया है। इन दोनों पर आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद समय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे शुरुआती जांच प्रभावित हुई और मामले की दिशा भटक गई। एसएसपी ने इसे गंभीर कर्तव्यहीनता और जांच में विफलता माना है।

 

दरअसल, शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्रा को 6 जनवरी को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उसी दिन पुलिस को सूचना दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद 6, 7 और 8 जनवरी तक चित्रगुप्तनगर थाना पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय बनी रही। करीब 72 घंटे तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। 9 जनवरी को छात्रा की हालत गंभीर होने के बाद ही पुलिस की सक्रियता बढ़ी।

 

इसी दौरान अस्पताल के एक डॉक्टर ने पीड़िता के परिजनों को इशारों में बताया कि छात्रा के साथ कुछ गलत हुआ है। इसके बाद परिजनों ने रेप का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई। बावजूद इसके, आरोप है कि पुलिस मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश करती रही। जबकि परिजन छात्रा के शरीर पर मौजूद चोट के निशानों के आधार पर जबरदस्ती की बात कह रहे थे।

 

इस पूरे मामले में चित्रगुप्तनगर थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी की भूमिका सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में रही। आरोप है कि उन्होंने खुद घटनास्थल पर जाने के बजाय अपने निजी ड्राइवर को सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर लाने के लिए भेज दिया। बाद में मामला तूल पकड़ने और मीडिया में किरकिरी होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने जांच पटना पुलिस से लेकर एसआईटी को सौंप दी।

 

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट और परिजनों के गंभीर आरोपों के बाद पुलिस पर लीपापोती का दबाव बढ़ा, जिसके बाद दो अधिकारियों को निलंबित किया गया। हालांकि, अब भी इस मामले का मुख्य आरोपी फरार है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल बने हुए हैं।

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