भागलपुर स्थित टीएनबी कॉलेज में भूगोल विभाग के तत्वावधान में एक दिवसीय भूगोल प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसे प्रो. (डॉ) दीपो महतो, प्राचार्य टीएनबी कॉलेज, प्रो. (डॉ) अनिरुद्ध कुमार, प्राचार्य बीएन कॉलेज भागलपुर, प्रो. (डॉ) उमेश प्रसाद सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष भूगोल विभाग, प्रो. (डॉ) शरत चन्द्र मंडल, प्रो. (डॉ) विरेन्द्र प्रसाद शर्मा, डॉ प्रशांत कुमार, विभागाध्यक्ष भूगोल स्नातकोत्तर विभाग टीएमबीयू तथा डॉ जनेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से संपन्न किया। इसके बाद कुलगीत का गायन किया गया।
मंचासीन अतिथियों का स्वागत संबोधन डॉ जनेंद्र कुमार, विभागाध्यक्ष भूगोल, टीएनबी कॉलेज द्वारा किया गया। वहीं विषय प्रवेश डॉ राधा कुमारी, सहायक प्राध्यापक, टीएनबी कॉलेज ने किया। उन्होंने प्रदर्शनी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण को जीवंत बनाए रखने के लिए समाज में जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं द्वारा लगभग 80 आकर्षक और ज्ञानवर्धक मॉडल प्रस्तुत किए गए। इनमें वाटर साइकिल, आधुनिक कृषि पद्धति, ओजोन—हमारी सुरक्षा कवच, सोलर सिस्टम, ध्रुवीय क्षेत्रों में वायुमंडल का प्रभाव, मैंग्रोव का महत्व, सुनामी के कारण जैसे विषय शामिल रहे। सभी मॉडल डॉ राधा कुमारी के निर्देशन में तैयार किए गए, जिनमें छात्रों की मेधा और रचनात्मकता स्पष्ट रूप से झलकी।
प्राचार्य प्रो. (डॉ) दीपो महतो ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में ग्रीन हाउस प्रभाव पर विस्तार से चर्चा करते हुए पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. (डॉ) उमेश प्रसाद सिंह ने कहा कि “पर्यावरण है तो हम हैं, इसकी सुरक्षा और संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है।” वहीं प्रो. (डॉ) शरत चन्द्र मंडल ने भूगोल प्रदर्शनी को अतुलनीय बताते हुए इसे सामाजिक विज्ञान से जोड़कर इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया। डॉ विरेन्द्र प्रसाद शर्मा ने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को आशीर्वाद प्रदान किया।
डॉ प्रशांत कुमार ने कहा कि मानव और पर्यावरण एक-दूसरे पर आश्रित हैं। निर्णायक मंडल में शामिल राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ मनोज कुमार ने प्रतिभागियों से मॉडलों की जानकारी लेकर मूल्यांकन किया। विजेताओं की घोषणा एवं पुरस्कार वितरण अगले दिन किया जाएगा। प्रदर्शनी कल तक चलेगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति रही। मंच संचालन डॉ विमल कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ मुकुल आनंद द्वारा प्रस्तुत किया गया।
