भागलपुर व्यवहार न्यायालय परिसर में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पति–पत्नी के बीच करीब एक घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। यह मामला वैवाहिक विवाद और दहेज उत्पीड़न से जुड़ा हुआ है, जिसमें पत्नी ने अपने पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया है।

 

कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पत्नी जहां अपने लगाए गए आरोपों पर अडिग नजर आई, वहीं पति अपनी पत्नी को अपने साथ ले जाने की जिद पर अड़ा रहा। इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हाई वोल्टेज ड्रामे में तब्दील हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि न्यायालय परिसर में मौजूद अन्य लोगों की भीड़ जुट गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय प्रशासन ने तत्काल सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। कोर्ट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस और न्यायालय कर्मियों ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया।

 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले में बेहद अहम और स्पष्ट टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि पत्नी बालिग है और उसे अपने जीवन से जुड़े फैसले स्वयं लेने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जिसके साथ रहना चाहे, रह सकती है। इस पर न तो पति का और न ही उसके माता-पिता का कोई अधिकार बनता है।

 

कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद माहौल धीरे-धीरे शांत हुआ और दोनों पक्षों को समझाया गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि दहेज उत्पीड़न से जुड़ा मामला कानून के तहत है और इसकी सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे जारी रहेगी।

 

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद न्यायालय परिसर में शांति बहाल हो गई है, लेकिन कोर्ट परिसर में हुए इस हाई वोल्टेज ड्रामे को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे वैवाहिक विवादों में कानून और व्यक्तिगत अधिकारों की अहम मिसाल के रूप में देख रहे हैं।

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