नवगछिया में कड़ाके की ठंड के बीच एक चिंताजनक और असामान्य घटना सामने आई है। शहर के कचहरी मैदान परिसर में सोमवार सुबह दर्जनों कौवे मृत अवस्था में पाए गए, जबकि कुछ कौवे तड़पते हुए नजर आए। इस दृश्य को देखकर सुबह टहलने और व्यायाम करने पहुंचे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए और पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कचहरी मैदान और आसपास के क्षेत्रों में कौवों का एक बड़ा झुंड लंबे समय से मौजूद था। अचानक इतनी बड़ी संख्या में कौवों का मृत मिलना सामान्य घटना नहीं मानी जा रही है। कुछ कौवों का जमीन पर छटपटाना इस बात की ओर इशारा करता है कि उनकी मौत अचानक और पीड़ादायक हालात में हुई है।
इस संबंध में पक्षी विशेषज्ञ दीपक कुमार, बायोडायवर्सिटी एक्सपर्ट, ने आशंका जताई है कि आसपास के खेतों या पोखरों में जहरीले पदार्थों का उपयोग किया गया हो सकता है। उन्होंने बताया कि अक्सर पोखर खाली करने के दौरान बचे पानी में जहरीले रसायन मिला दिए जाते हैं। इसके अलावा, तैयार हो रही फसलों में कीटनाशकों और रासायनिक दवाओं का छिड़काव भी किया जाता है। कौवों की आदत होती है कि वे पानी देखकर पीने या नहाने के लिए उतर जाते हैं, जिससे जहरीले तत्व उनके शरीर में चले जाते हैं और कुछ ही समय में उनकी मौत हो जाती है।
जनवरी महीने की कड़ाके की ठंड पहले से ही पक्षियों के लिए कठिन समय होती है। भोजन और स्वच्छ पानी की कमी के कारण कमजोर पक्षी यदि जहरीले पदार्थ के संपर्क में आ जाएं, तो उनके बचने की संभावना बेहद कम हो जाती है।
फिलहाल कौवों की मौत के वास्तविक कारण का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले की गंभीर जांच कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। घटना के बाद क्षेत्र में चिंता और भय का माहौल बना हुआ है।
