बिहार की राजधानी पटना के युवक विनय कृष्ण ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, सफलता जरूर मिलती है। कॉरपोरेट जॉब छोड़कर स्टार्टअप शुरू करने का फैसला आसान नहीं होता, लेकिन विनय कृष्ण ने जोखिम उठाया और महज दो वर्षों में ही अपनी कंपनी को 35 करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर तक पहुंचा दिया। हालांकि, उनकी यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, मेहनत और अनुशासन छिपा है।
विनय कृष्ण ने वर्ष 2003 में एनआईटी पटना से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उस दौर में 2002 से 2004 के बीच वैश्विक मंदी का असर था, जिससे प्लेसमेंट के अवसर बेहद सीमित हो गए थे। पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद उन्हें डिग्री के बाद नौकरी नहीं मिल पाई। आईटी सेक्टर में आगे बढ़ने की चाह उन्हें बेंगलुरु ले गई, जहां उन्होंने मास्टर्स की पढ़ाई शुरू की।
बेंगलुरु में पढ़ाई के दौरान आर्थिक तंगी विनय के लिए बड़ी चुनौती थी। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के कारण पढ़ाई और जीवन-यापन का खर्च उठाना आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने पार्ट टाइम जॉब के तौर पर बैंक में क्रेडिट कार्ड बेचने का काम किया। दिन में काम और रात में पढ़ाई—यही उनकी दिनचर्या बन गई। इसी दौरान उन्होंने सी-डैक के साथ तकनीकी प्रशिक्षण लिया, जिसने उनके कौशल को और मजबूत किया।
इसके बाद विनय कृष्ण ने माइंडट्री की चयन प्रक्रिया में भाग लिया। 600 से अधिक उम्मीदवारों में से मात्र 9 लोगों का चयन हुआ और छह कठिन तकनीकी व कोडिंग राउंड पार कर उनका चयन हुआ। यह उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ। आगे चलकर उन्होंने विप्रो, इंफोसिस और IBM जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों में काम किया और Unilever, Lloyds Bank, Allianz जैसे अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट्स के लिए भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में सेवाएं दीं।
आखिरी कॉरपोरेट जॉब के दौरान वे ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत थे। वहीं उन्होंने अपनी खुद की पहचान बनाने के उद्देश्य से Astura Global की स्थापना की। यह कंपनी एआई आधारित है और डेटा एनालिटिक्स के क्षेत्र में हेल्थ, इंश्योरेंस और बैंकिंग सेक्टर को सेवाएं प्रदान करती है। खास बात यह है कि भारत में कंपनी का रजिस्ट्रेशन बिहार में कराया गया है, क्योंकि विनय का अपने राज्य से गहरा जुड़ाव है। उनकी कंपनी के वर्कफोर्स में लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारी बिहारी हैं।
विनय कृष्ण बताते हैं कि स्टार्टअप शुरू करते समय परिवार का पूरा नैतिक समर्थन मिला। माता-पिता, पत्नी और परिवार ने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया। पत्नी सत्या ऑस्ट्रेलिया में बैंकिंग सेक्टर में कार्यरत हैं, जबकि माता-पिता पटना में रहते हैं। विनय मानते हैं कि फैमिली सपोर्ट ने ही उन्हें जोखिम लेने की ताकत दी।
बिहार के युवाओं को संदेश देते हुए विनय कृष्ण कहते हैं कि शिक्षा को कभी नजरअंदाज न करें, लेकिन पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट पर भी ध्यान दें। छोटे-छोटे सर्टिफिकेट कोर्स, टेक्निकल और वोकेशनल ट्रेनिंग आज के समय में युवाओं को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करती है। सीखने की प्रवृत्ति ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
