सहरसा जिले के नौहट्टा नगर पंचायत का राजनीतिक माहौल उस समय अचानक गर्मा गया, जब पूर्व सांसद और चर्चित नेता आनंद मोहन सिंह बिना किसी पूर्व घोषणा के नौहट्टा पहुंचे। उनका यह आकस्मिक दौरा स्थानीय राजनीति के लिए किसी बड़े घटनाक्रम से कम नहीं माना जा रहा है। आनंद मोहन सीधे पूर्व मुखिया बब्बू सिंह के निवास पर पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक अंदाज़ में स्वागत किया गया। बब्बू सिंह ने गुलदस्ता और माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया। दोनों नेताओं की मुलाक़ात को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं तेज़ हो गई हैं कि यह सिर्फ औपचारिक मुलाक़ात थी या आने वाले दिनों के किसी राजनीतिक समीकरण की नींव।
मुलाक़ात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए आनंद मोहन सिंह ने हाल ही में चर्चा में आए बुलडोजर अभियान पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक राज्य में बिना जांच-पड़ताल और उचित कानूनी प्रक्रिया के इस तरह की कार्रवाई “लोकतंत्र का मजाक उड़ाने” के बराबर है। उनका कहना था कि प्रशासन को अदालत के आदेश के बाद ही नियमों के तहत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि किसी निर्दोष को नुकसान न पहुंचे और पारदर्शिता बरकरार रहे।
उन्होंने कहा कि सिर्फ बुलडोजर चलाकर कानून-व्यवस्था का संदेश देना लोकतंत्र नहीं है; इसकी जगह निष्पक्ष जांच और कानूनी विधियों का पालन होना चाहिए।
इसी दौरान आनंद मोहन ने चुनाव परिणामों के बाद विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर भी निशाना साधा। उन्होंने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि हार का ठीकरा सरकारी तंत्र पर फोड़ना विपक्ष की पुरानी आदत है। उनका कहना था कि जनता ने विश्वास के साथ सरकार को चुना है और विपक्ष बिना किसी ठोस सबूत के सिर्फ वातावरण में अविश्वास का जहर घोलने की कोशिश कर रहा है।
आनंद मोहन ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और जब जनता फैसला देती है, तो उसे स्वीकार करना विपक्ष की जिम्मेदारी है। बेवजह आरोप लगाना जनता के फैसले का अपमान है।
आनंद मोहन सिंह की यह नौहट्टा यात्रा और उनके बयान स्थानीय और जिला स्तरीय राजनीति को नया मोड़ देती प्रतीत हो रही है। उनके इस दौरे को लेकर अलग-अलग सियासी गुटों में चर्चाओं का दौर जारी है। समर्थक इसे सामान्य मुलाक़ात बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक संकेतों के तौर पर देख रहे हैं।
कुल मिलाकर, नौहट्टा में आनंद मोहन के अचानक पहुंचने और बुलडोजर कार्रवाई साथ ही विपक्ष पर उनके बेबाक बयान ने क्षेत्र के राजनीतिक तापमान को और अधिक बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में इस मुलाक़ात और बयानों के क्या सियासी मायने निकलते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
