देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने भूमिगत खदानों में कार्यरत खनिकों की सुरक्षा और सुविधा को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने चेयर लिफ्ट मैन-राइडिंग सिस्टम को तकनीकी रूप से अपग्रेड किया है। इस नई तकनीक से खनिकों को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, स्थिर और आरामदायक सफर मिलेगा। साथ ही झटकों और कंपन में कमी आने से कमर और रीढ़ पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा।
आईआईटी (आईएसएम) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा विकसित इस उन्नत प्रणाली का उद्देश्य केवल खनिकों की यात्रा को आसान बनाना नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने और ऊर्जा दक्षता में सुधार करना भी है। परियोजना का नेतृत्व कर रहे सहायक प्राध्यापक डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि सिस्टम के हाइड्रोलिक पावर पैक ड्राइव यूनिट में डिजाइन संबंधी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा बेहतर हैंड-पोजिशनिंग और सपोर्ट सिस्टम विकसित किया गया है, जिससे यात्रा के दौरान कंपन और झटकों का असर काफी कम हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि भूमिगत खदानों में प्रतिदिन हजारों खनिक चेयर लिफ्ट मैन-राइडिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं। लगातार झटकों और कंपन के कारण उन्हें कमर दर्द, रीढ़ पर दबाव और शारीरिक थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नई तकनीक इन चुनौतियों को काफी हद तक कम करेगी और खनिकों को अधिक सुरक्षित व आरामदायक परिवहन उपलब्ध कराएगी।
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद लगातार उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित कर रहा है। संस्थान के शोधकर्ता केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खनन कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों के साथ मिलकर वास्तविक समस्याओं का अध्ययन करते हैं और उनके व्यावहारिक समाधान तैयार करते हैं। कई बार उद्योगों से प्राप्त चुनौतियों पर शोध किया जाता है, जबकि कई मामलों में वैज्ञानिक स्वयं खदानों और औद्योगिक संयंत्रों का दौरा कर तकनीकी आवश्यकताओं का आकलन करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई तकनीक के लागू होने से खनिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही ऊर्जा की बचत और बिजली की खपत में कमी आने से खनन उद्योग को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।







