सहरसा। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 34 में सड़क निर्माण कार्य में हुई गंभीर अनियमितता के उजागर होने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। आठ दिन पहले जिस सड़क पर आठ इंच पीसीसी ढलाई होनी थी, वहां महज चार इंच मोटाई की ढलाई कर दी गई थी। मामला सामने आते ही स्थानीय लोगों ने आवाज उठाई और मीडिया ने इसे प्रमुखता से दिखाया। परिणामस्वरूप नगर निगम को मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ी और शनिवार को सड़क पर दो इंच की अतिरिक्त ढलाई कराई गई, जबकि शेष दो इंच की ढलाई आगे की प्रक्रिया में की जाएगी।

यह पहली बार है जब पहले से बनी सड़क को दोबारा ढालने का कार्य हो रहा है। इससे आम लोगों में खुशी और उत्साह है। उनका कहना है कि लंबे समय से नगर निगम के निर्माण कार्यों में गड़बड़ियों की शिकायतें उठती रही हैं, लेकिन शायद ही कभी कार्रवाई होती थी। अब जब एक मामले में गलत कार्य को सुधारने की पहल हुई है तो लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।

नगर अभियंता दिलीप कुमार यादव ने बताया कि स्थानीय स्तर पर मिली शिकायतों के बाद जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि सड़क निर्माण कार्य में मानक का पालन नहीं हुआ है। इसके बाद विभाग ने संबंधित संवेदक को त्रुटिपूर्ण कार्य सुधारने का निर्देश दिया। यही कारण है कि अतिरिक्त ढलाई कराई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, यह सड़क लगभग 14 लाख रुपये की लागत से बन रही है, जिसमें नाला निर्माण शामिल नहीं है। खास बात यह है कि इसके ठीक एक माह पहले ही विधान पार्षद डॉ. अजय कुमार सिंह के मद से जिला योजना विभाग ने 670 फीट पीसीसी सड़क का निर्माण 14.95 लाख की लागत से कराया था। लेकिन इसके बाद नगर निगम ने विभागीय मद से 14.96 लाख रुपये की लागत से 300 फीट सड़क का निर्माण फिर से शुरू किया, जिसमें वही 100 फीट हिस्सा भी शामिल था। यानी एक ही इलाके में बेहद कम समय के भीतर दो-दो बार सड़क निर्माण कार्य कराया गया।

इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब सरकारी राशि खर्च हो रही है तो उसका सही उपयोग होना चाहिए। बार-बार एक ही जगह सड़क बनाना और उसमें भी मानकों की अनदेखी करना भ्रष्टाचार और लापरवाही का साफ संकेत है।

लोगों का कहना है कि यदि मीडिया और नागरिक सक्रिय नहीं होते तो यह मामला भी दबा दिया जाता और जनता के पैसे की बर्बादी पर किसी की नजर नहीं जाती। अब जबकि प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, लोगों को उम्मीद है कि अन्य जगहों पर भी इसी तरह जांच और कार्रवाई होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए पारदर्शी निगरानी तंत्र जरूरी है। निर्माण कार्य की शुरुआत से लेकर पूर्णता तक की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि हर नागरिक उस पर नजर रख सके।

फिलहाल वार्ड नंबर 34 की इस सड़क ने नगर निगम की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन बाकी जगहों पर भी इसी तरह की सख्ती दिखाता है या फिर यह मामला केवल एक अपवाद बनकर रह जाता है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *