बीएयू सबौर में QField आधारित डिजिटल मृदा सर्वेक्षण पर दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण संपन्न, भू-स्थानिक तकनीकों से सशक्त होगा मृदा मानचित्रण

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के मृदा विज्ञान विभाग स्थित रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस प्रयोगशाला में 21 एवं 22 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम (NSMP) 1:10,000 स्केल के अंतर्गत QField आधारित फील्ड सर्वेक्षण संचालन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मृदा सर्वेक्षण से जुड़े परियोजना कर्मियों और यंग प्रोफेशनल्स को आधुनिक डिजिटल भू-स्थानिक तकनीकों से प्रशिक्षित करना था, ताकि मृदा मानचित्रण कार्य अधिक सटीक, तेज और मानकीकृत बनाया जा सके।

 

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यह प्रशिक्षण बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के मार्गदर्शन एवं अनुमोदन में आयोजित किया गया। कुलपति ने मृदा संसाधन आकलन और अनुसंधान में आधुनिक जियोस्पेशियल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम का संचालन मृदा विज्ञान विभाग के विश्वविद्यालय प्राध्यापक एवं राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम के प्रधान अन्वेषक डॉ. अंशुमान कोहली के नेतृत्व में हुआ। इस आयोजन में सह-प्रधान अन्वेषकों डॉ. इंगले सागर नाडूलाल, डॉ. चंद्रभान पटेल, डॉ. भवानी प्रसाद मंडल, डॉ. विमल कुमार सहित अन्य वैज्ञानिकों और परियोजना कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

 

प्रशिक्षण के तकनीकी सत्रों का संचालन अनुसंधान सहयोगी डॉ. अंजनी कुमार ने किया। प्रतिभागियों को QField और QGIS के माध्यम से डिजिटल फील्ड डेटा संग्रहण, मोबाइल प्लेटफॉर्म पर प्रोजेक्ट तैयार करना, जीपीएस आधारित लोकेशन पहचान, भू-संदर्भित मृदा अवलोकन, स्थानिक एवं गुणात्मक डेटा संपादन, फील्ड फोटोग्राफी, डिजिटल रिकॉर्ड संधारण तथा डेटा सिंक्रोनाइजेशन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

 

प्रशिक्षण के दौरान आयोजित अभ्यास सत्रों और संवादात्मक चर्चाओं में प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की। विशेषज्ञों ने बताया कि इस प्रशिक्षण से डिजिटल मृदा सर्वेक्षण की तकनीकी दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम के तहत सर्वेक्षण कार्यों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता और बेहतर होगी।

 

कार्यक्रम के समापन पर आयोजित फीडबैक सत्र में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और व्यावहारिक बताया। आयोजकों ने कहा कि डिजिटल भू-स्थानिक तकनीकों के समावेशन से भविष्य में मृदा संसाधन मानचित्रण और अनुसंधान कार्यों को नई गति मिलेगी तथा यह प्रशिक्षण विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ।

 

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