बिहार की राजनीति के वरिष्ठ और लोकप्रिय नेता, पूर्व मंत्री रामानंद सिंह उर्फ आरएन सिंह का शनिवार रात पटना में निधन हो गया। वे 83 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। रात 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल परबत्ता विधानसभा क्षेत्र बल्कि समूचे बिहार की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है।
आरएन सिंह का जन्म परबत्ता प्रखंड के एक साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और जनसेवा की भावना से राजनीति में ऊँचाई हासिल की। वे पांच बार परबत्ता विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। उनके कार्यकाल के दौरान परबत्ता क्षेत्र में कई विकास कार्यों की नींव रखी गई। शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में उनकी दूरदर्शिता और फैसलों को आज भी लोग याद करते हैं।
रामानंद सिंह का राजनीतिक जीवन सादगी और ईमानदारी का उदाहरण रहा। उन्होंने हमेशा जनहित को प्राथमिकता दी और सत्ता को सेवा का माध्यम माना। वे सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और गरीबों, किसानों तथा युवाओं के मुद्दों को विधानसभा में मजबूती से उठाते थे।
आरएन सिंह के परिवार की राजनीतिक विरासत भी जारी है। उनके बड़े पुत्र संजीव कुमार वर्तमान में परबत्ता से विधायक हैं। वहीं, उनके छोटे पुत्र राजीव कुमार विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) हैं। यह परिवार क्षेत्र में जनसेवा और विकास के कार्यों में निरंतर सक्रिय रहा है।
उनकी मौत की खबर मिलते ही राजनीतिक, सामाजिक और आम जनजीवन में शोक की लहर फैल गई। मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, स्थानीय जनप्रतिनिधि और आम नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर भी श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई है।
रविवार को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव परबत्ता लाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम यात्रा में हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है। परबत्ता में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें विभिन्न दलों के नेता भाग लेंगे।
रामानंद सिंह का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनके विचार, उनकी शैली और जनसेवा का समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। उनका जाना न केवल एक राजनीतिक शून्य है, बल्कि एक युग का अंत भी है।