भागलपुर । सदर अस्पताल से एक फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी होने का मामला सामने आया है। प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. अंजना कुमारी ने मामले की जांच का निर्देश दिया है।

कहलगांव के हरिगांव के रंजीत कुमार अपनी दिव्यांग बहन अर्चना कुमारी को साथ लेकर शनिवार को जब प्रमाण पत्र को ऑनलाइन कराने पहुंचे तो पता चला कि इस सीरियल नंबर का कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है।

जबकि उसी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल अर्चना कुमारी पिछले दो साल से कर रही है। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन में भी उसे संलग्न किया है।

शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान भी इसी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया है। अर्चना के भाई रंजीत कुमार ने बताया कि उसने करीब दो साल पहले सदर अस्पताल से अपनी वहन का दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाया था।

उस पर सदर अस्पताल के तीन डॉक्टरों के हस्ताक्षर हैं। मेडिकल बोर्ड के सामने अर्चना की जांच भी हुई थी। बताया जाता है कि प्रमाण पत्र पर तीन डॉक्टर में से दो के हस्ताक्षर स्पष्ट नहीं है।

एक डॉक्टर संजय कुमार का हस्ताक्षर दिख रहा है। बताया जाता है कि जिस तारीख को प्रमाण पत्र जारी किया गया है, उस दिन डॉक्टर संजय कुमार ड्यूटी पर नहीं थे।

प्रभारी सिविल सर्जन अंजना कुमारी ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर अस्पताल के कर्मचारियों की शिनाख्त परेड भी की जाएगी।

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