
भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड अंतर्गत बरारी ग्राम पंचायत में निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भवन निर्माण कार्य में कथित अनियमितता, गुणवत्ता की अनदेखी और काम में देरी का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने उप विकास आयुक्त (डीडीसी), भागलपुर से शिकायत की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने और निर्धारित मानकों के अनुसार काम सुनिश्चित कराने की मांग की है।
वर्ष 2024 से चल रहा निर्माण, अब तक पूरा नहीं
ग्रामीणों की ओर से दिए गए शिकायत पत्र के अनुसार, बरारी पंचायत में पंचायत सरकार भवन का निर्माण एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के माध्यम से कराया जा रहा है। आरोप है कि निर्माण कार्य वर्ष 2024 में शुरू हुआ था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। काम की धीमी गति के कारण पंचायत सरकार भवन का लाभ स्थानीय लोगों को मिलने में देरी हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सरकार भवन का निर्माण समय पर पूरा होना चाहिए, ताकि पंचायत स्तर से जुड़े कार्यों के लिए लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। निर्माण में हो रही देरी से ग्रामीणों को इस सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ रहा है।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल
शिकायत में भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण कार्य में कथित तौर पर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं हो रहा है। इससे भवन की मजबूती और लंबे समय तक टिकाऊ रहने को लेकर आशंका जताई गई है।
ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि निर्माण में लापरवाही बरती जाती है, तो इससे सरकारी धन के उचित उपयोग पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
डीडीसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग
ग्रामीणों ने उप विकास आयुक्त से पूरे मामले की जांच कराने, निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की पड़ताल करने और संबंधित एजेंसी को निर्धारित मानकों के अनुरूप काम पूरा कराने का निर्देश देने की मांग की है।
पंचायत सरकार भवन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पंचायत संबंधी कार्यों और सरकारी सेवाओं को लोगों के लिए सुलभ बनाना है। ऐसे में निर्माण में देरी और गुणवत्ता संबंधी शिकायतें महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल, संबंधित निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।





