
पलामू, झारखंड। नवरात्र के पावन अवसर पर सामाजिक संस्था वरदान चैरिटेबल ट्रस्ट ने अनोखे कन्यापूजन का आयोजन कर समाज को समानता और सम्मान का संदेश दिया। संस्था की ओर से हर साल आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में खास तौर पर झुग्गी बस्तियों में रहने वाली और कचरा चुनकर जीवनयापन करने वाली बच्चियों को सम्मानित किया जाता है। संस्था का उद्देश्य समाज में अमीर-गरीब और ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर सभी कन्याओं को समान सम्मान दिलाना है।
टीम वरदान का यह आयोजन पारंपरिक कन्यापूजन से अलग रहा। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बच्चियों को आमंत्रित कर पूरे सम्मान के साथ पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चियों के पैर धोने और उनमें आलता लगाने से हुई। इसके बाद उन्हें बिंदी और चुनरी पहनाई गई। बच्चियों को विभिन्न प्रकार के व्यंजन परोसे गए और विधि-विधान से उनकी आरती उतारी गई।
इस दौरान संस्था के सदस्यों ने बच्चियों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद सभी बच्चियों को उपहार, नकद राशि, कॉपी और पेन सहित अन्य आवश्यक सामग्री भेंट की गई। सम्मानपूर्वक विदाई देकर संस्था ने उनके चेहरे पर खुशी लाने का प्रयास किया।
वरदान चैरिटेबल ट्रस्ट की यह पहल केवल धार्मिक परंपरा निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज में व्याप्त भेदभाव को दूर करने का प्रयास भी किया जाता है। संस्था का मानना है कि हर बेटी सम्मान, स्नेह और बेहतर अवसर की हकदार है। किसी बच्ची का सम्मान उसकी आर्थिक स्थिति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर तय नहीं होना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान आसपास दतवन और दोना बेचकर अपनी आजीविका चलाने वाले लोगों के बीच भी प्रसाद का वितरण किया गया। इस पहल के जरिए समाज के जरूरतमंद वर्गों को अपनेपन का एहसास कराने का प्रयास किया गया।
टीम वरदान का यह अनोखा कन्यापूजन सामाजिक समरसता, मानवीय संवेदना और बेटियों के सम्मान का प्रेरणादायक उदाहरण है। संस्था की यह पहल समाज के अन्य लोगों को भी जरूरतमंदों की मदद करने और हर बेटी को समान अधिकार एवं सम्मान देने के लिए प्रेरित करती है।
संवाददाता: सत्यम शुक्ला, पलामू (झारखंड)





