मोतिहारी: शारदीय नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित प्रसिद्ध संकट मोचन धाम मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। करीब 100 वर्ष पुराने इस मंदिर में इस वर्ष 2001 कलशों की स्थापना की गई है। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों का पहुंचना जारी है। श्रद्धालु मां दुर्गा और भगवान हनुमान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
मोतिहारी का संकट मोचन धाम मंदिर इन दिनों पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है। नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। मां कात्यायनी की आराधना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर में स्थापित 2001 कलश भक्तों की आस्था और धार्मिक विश्वास का प्रतीक बने हुए हैं।
करीब एक सदी पुराने इस धार्मिक स्थल का इतिहास भी काफी खास है। बताया जाता है कि मंदिर में सामूहिक कलश स्थापना की शुरुआत महज 51 कलशों से हुई थी। समय के साथ मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और कलश स्थापना की संख्या में भी लगातार वृद्धि हुई। आज यह संख्या बढ़कर 2001 तक पहुंच गई है। पूर्वी चंपारण जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि संकट मोचन धाम में सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। यही वजह है कि नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की विशेष भीड़ देखने को मिलती है। मंदिर के संस्थापक एवं प्रधान सेवक केदारनाथ सिंह ने इस धार्मिक स्थल की स्थापना की थी। मंदिर में भगवान हनुमान के साथ मां दुर्गा का मंदिर भी स्थापित है। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, मोतिहारी के संकट मोचन धाम में 2001 कलशों की स्थापना नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना के बीच मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल है। भक्त मां दुर्गा से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं।








