जामताड़ा। झारखंड के जामताड़ा जिले के सरखेलडीह स्थित दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा की आराधना की परंपरा लगभग 220 वर्षों से चली आ रही है। यहां दुर्गा पूजा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। खास बात यह है कि करीब ढाई सौ रुपये से शुरू हुई पूजा का बजट आज बढ़कर तीन से चार लाख रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि, समय के साथ खर्च बढ़ा है, लेकिन मां दुर्गा के प्रति ग्रामीणों की श्रद्धा आज भी कायम है।
एंकर लिंक: जामताड़ा के सरखेलडीह में दुर्गा पूजा की परंपरा कई पीढ़ियों से निभाई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उनके पूर्वजों और दादा-परदादाओं के समय से यहां मां दुर्गा की पूजा-अर्चना होती आ रही है। उस दौर में सीमित संसाधनों के बीच पूजा का आयोजन किया जाता था। बताया जाता है कि उस समय पूरी पूजा पर लगभग 200 से 250 रुपये खर्च होते थे।
वीओ: समय बीतने के साथ महंगाई बढ़ी और पूजा के आयोजन का स्वरूप भी बदलता गया। आज सरखेलडीह दुर्गा मंदिर में दुर्गा पूजा संपन्न कराने के लिए लगभग तीन से चार लाख रुपये तक खर्च किए जाते हैं। पूजा की तैयारियों, धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य व्यवस्थाओं के लिए पहले की तुलना में अधिक धनराशि की आवश्यकता होती है।
इसके बावजूद ग्रामीण आपसी सहयोग और सामूहिक भागीदारी से इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। हर वर्ष लोगों का प्रयास रहता है कि मां दुर्गा की पूजा विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हो।
सरखेलडीह की यह परंपरा नई पीढ़ी के लिए भी महत्वपूर्ण है। लगभग 220 वर्षों से चली आ रही पूजा इस बात का उदाहरण है कि सामूहिक एकजुटता और धार्मिक आस्था के जरिए सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोकर रखा जा सकता है।
स्थानीय लोगों के लिए यह परंपरा गर्व का विषय है। बदलते समय और बढ़ते खर्च के बावजूद ग्रामीणों का संकल्प है कि मां दुर्गा की आराधना की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक जारी रहेगी।
संवाददाता, जामताड़ा।






