भागलपुर। बिहार के भागलपुर में रेणु देवी हत्याकांड में अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दोषी को दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। करीब दो साल पुराने इस मामले में अदालत के फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बेहद गंभीर था हत्याकांड
मामले में मृतका की पहचान रेणु देवी के रूप में हुई थी। जानकारी के अनुसार, रेणु देवी की दूसरी शादी अरविंद पासवान के साथ हुई थी। उनकी हत्या के बाद शव पर कई गंभीर जख्म पाए गए थे। सबसे अहम बात यह थी कि शव का सिर गायब था। इससे पुलिस के सामने मृतका की पहचान करना बड़ी चुनौती बन गया था।
घटना के करीब सात से आठ दिन बाद नरमुंड बरामद हुआ। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए वैज्ञानिक तरीके से मृतका की पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
DNA जांच से हुई पहचान की पुष्टि
इस मामले में मृतका की मां के DNA नमूने का बरामद नरमुंड से मिलान कराया गया। जांच में DNA का मिलान होने के बाद मृतका की पहचान की पुष्टि हुई। इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पुलिस को आगे की कानूनी प्रक्रिया में मदद मिली।
अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
अपर लोक अभियोजक राजेश कुमार सिंह के अनुसार, जिला एवं सत्र न्यायाधीश-द्वितीय की अदालत ने मामले में दोषी को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दो महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।
करीब दो साल बाद आए इस फैसले से मामले में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा हुआ है। DNA जांच और न्यायालय में हुई सुनवाई के बाद सुनाए गए फैसले ने एक बार फिर गंभीर आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्यों की अहमियत को रेखांकित किया है।








