शारदीय नवरात्रि की शुरुआत मां शैलपुत्री की आराधना के साथ हो गई है। माता के भक्त अपनी-अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मां की भक्ति में लीन हैं। इसी बीच राजधानी पटना में साधना का एक अनोखा रूप देखने को मिल रहा है। यहां नौलखा दुर्गा मंदिर में बाबा नागेश्वर दास अपने सीने पर 21 कलश रखकर मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं। इन कलशों का कुल वजन 65 किलो से अधिक है। आइए जानते हैं उनकी इस अनोखी साधना के बारे में।
पटना के सचिवालय स्थित नौलखा दुर्गा मंदिर में श्री श्री 108 बाबा नागेश्वर दास नवरात्रि के नौ दिनों तक विशेष साधना करते हैं। बाबा मिट्टी की सेज पर पीठ के बल लेटते हैं और उनके सीने पर एक के ऊपर एक 21 कलश रखे जाते हैं। इनकी कुल ऊंचाई 11 फीट से अधिक बताई जा रही है। कलशों को स्थिर रखने के लिए धागे का सहारा दिया जाता है।
बाबा नागेश्वर दास के मुताबिक, वह साल 1997 से लगातार इस साधना को करते आ रहे हैं। 35 वर्ष की उम्र में शुरू हुई यह साधना अब उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। उनका कहना है कि मां दुर्गा की कृपा और आस्था से उन्हें यह शक्ति मिलती है। वह इस साधना के जरिए समाज, राज्य और देश की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
बाबा ने बताया कि नवरात्रि से पहले उन्हें सपने में मां की ओर से ऐसी साधना करने का संदेश मिला था। इसके बाद उन्होंने यह परंपरा शुरू की।
हालांकि, इस साधना को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। आईजीआईएमएस की डाइटिशियन डॉ. पल्लवी के अनुसार, लंबे समय तक बिना भोजन और पानी के रहना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे ऊर्जा की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डॉ. पल्लवी सामान्य लोगों को लंबे निर्जला उपवास से बचने और उपवास के दौरान पानी पीने की सलाह देती हैं। गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को ऐसी साधना नहीं करनी चाहिए। तबीयत बिगड़ने पर उपवास समाप्त कर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
कुल मिलाकर, बाबा नागेश्वर दास की यह साधना नवरात्रि में आस्था का अनोखा उदाहरण है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी धार्मिक साधना में अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।








