
वैशाली: अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने के बाद आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन में लापता हुए शहीद अग्निवीर जवान आदित्य कुमार का अस्थि कलश 45 दिन बाद उनके पैतृक गांव महुआ के रजौली पहुंचा। अस्थि कलश के गांव पहुंचते ही पूरा माहौल गमगीन हो गया। अपने लाल को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग जुटे। सभी ने नम आंखों से शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी।
राजकीय सम्मान के साथ निकली अंतिम यात्रा
अस्थि कलश के रजौली गांव पहुंचने के बाद पूरे सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा गांव से होते हुए हाजीपुर के कोनहारा घाट पहुंची। यहां राजकीय सम्मान के साथ शहीद आदित्य कुमार के अस्थि कलश का विसर्जन किया गया। इस दौरान भारत माता की जय और शहीद अमर रहें के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।
अप्रैल 2025 में सेना में हुए थे भर्ती
बताया गया कि आदित्य कुमार अग्निवीर योजना के तहत अप्रैल 2025 में सेना में भर्ती हुए थे। 15 अगस्त की सुबह अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आने से सात जवान लापता हो गए थे। इनमें दो जवानों को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाल लिया गया था, जबकि पांच जवानों की तलाश जारी थी।
45 दिन बाद परिजनों को मिली सूचना
तीन दिन पहले सेना के अधिकारियों ने आदित्य कुमार के परिजनों को सूचना दी कि उनका शव मलबे से बरामद कर लिया गया है। शव की स्थिति ऐसी थी कि उसे गांव लाना संभव नहीं था। सेना की ओर से अरुणाचल प्रदेश में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद 45 दिन बाद उनका अस्थि कलश पैतृक गांव पहुंचाया गया।
नम आंखों से दी अंतिम विदाई
शहीद आदित्य कुमार की अंतिम विदाई के दौरान रजौली गांव का हर चेहरा गमगीन नजर आया। परिवार और ग्रामीणों के लिए यह बेहद भावुक पल था। लोगों ने कहा कि देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले आदित्य कुमार की स्मृति हमेशा गांव के लोगों के बीच जीवित रहेगी।





